[ambala] - - पोस्टमार्टम के बाद परिजनों ने एसआई पर सख्त एक्शन लेने की मांग की, संस्कार करने से किया इंकार

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नारायणगढ़। महुआखेड़ी निवासी रणधीर सिंह हत्या की साजिश काफी समय पहले से रची जा रही थी। इसी को लेकर मामले में चार कैदी मोहित, दिनकर, सुमित व मोहित छह माह से जमानत पर थे। चारों ने हाईकोर्ट में जमानत की अर्जी थी और चारों की जमानत का विरोध स्थानीय नारायणगढ़ थाना पुलिस ने किया था, मगर बावजूद इसके चारों को जमानत मिल गई। जमानत मिलने के बाद से ही रणधीर को धमकियां मिल रही थी। आरोप है कि पांचवें सजायाफ्ता कैदी रजविंद्र सिंह यमुनानगर जेल से ही धमकियां दे रहा था और वही साजिश का मास्टरमाइंड था। नारायणगढ़ थाना पुलिस को इस मामले की पूरी जानकारी परिजन समय-समय पर दे रहे थे, मगर बावजूद इसके पुलिस ने इस पूरे केस को सही तरीके एवं गंभीरता से नहीं लिया और इसका परिणाम रणधीर सिंह की हत्या स्वरूप अब सामने आया। हालांकि पुलिस ने तत्काल प्रभाव से नारायणगढ़ थाने के एसआई श्याम लाल को सस्पेंड कर दिया है, मगर सवाल है कि केवल सस्पेंड करना सही सजा है। धमकी मिलने की जिस एसआई को सौंपी जांच उसी ने धमकाया रणधीर सिंह के चचेरे भाई पूर्णचंद ने बताया कि बीती 23 फरवरी को जमानत पर बाहर आए मोहित ने अपने भाई रोहित के साथ मिलकर रणधीर सिंह को धमकियां दी थी। उसे जान से मारने की धमकी देने के अलावा उसे पिस्तौल भी दिखाई गई थी। इस मामले की शिकायत उसी दिन रणधीर व अन्य परिजनों ने नारायणगढ़ पुलिस थाने में दी थी। मगर पुलिस ने कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं की जिसके बाद यही शिकायत 26 फरवरी को जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में मंत्री कृष्ण लाल पंवार से की गई थी। मंत्री ने मामले की जांच के आदेश दिए थे और तब नारायणगढ़ थाने के एसआई श्याम लाल को यह जांच सौंपी गई थी। पूर्णचंद ने आरोप लगाया कि पुलिस ने सही तरीके से जांच नहीं की। एसआई श्याम लाल ने उलटा रणधीर सिंह व परिजनों को ही धमकाया और उस जांच में आरोपियों के ही परिवार के सदस्यों को गवाह बना कर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद यह जांच फाइल भी बंद कर दी गई। पूर्णचंद ने कहा कि यदि पुलिस उस समय सही कार्रवाई करती तो शायद आज रणधीर सिंह जिंदा होता। गवाही नहीं देने की भी दी थी धमकी पूर्णचंद ने बताया कि वर्ष 2013 में गुरदीप की हत्या के बाद मुख्य गवाह रणधीर सिंह था और करीब तीन वर्ष पहले रणधीर को गवाही नहीं देने के लिए यमुनानगर जेल में बंद रजविंद्र सिंह ने धमकाया था। उसने फोन पर रणधीर सिंह को धमकी दी थी कि यदि उसने गवाही दी तो उसे व उसके परिवार को खत्म कर दिया जाएगा। रजविंद्र के ही कहने पर मोहित और उसके भाई रोहित ने 23 फरवरी को धमकियां दी थी। संस्कार करने से किया इंकार तो फूले पुलिस के हाथ पांव हत्या मामले के बाद से ही पुलिस की पैनी नजर परिवार पर थी कहीं कोई विरोध प्रदर्शन न हो। एसपी ने मौके पर पहुंची एसआई को सस्पेंड करने का मौखिक आश्वासन दिया। इसके बाद शव पोस्टमार्टम के लिए नारायणगढ़ सिविल अस्पताल ले जाया गया। यहां पर पोस्टमार्टम के बाद परिजनों ने संस्कार करने से इंकार कर दिया। उनका कहना था कि जब तक कार्रवाई को लेकर कोई लिखित आश्वासन पुलिस नहीं देती तब तक वह शव नहीं उठाएंगे। तभी मौके पर मौजूद सीआईए इंस्पेक्टर कुलभूषण शर्मा ने एसपी ने परिजनों की बात कराई। एसपी ने बताया कि एसआई को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया गया है और आगामी कार्रवाई भी होगी। इस आश्वासन के बाद परिजन शव लेकर गए। छह गोलियां लगी थी रणधीर को पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ की रणधीर को छह गोलियां लगी थी। तीन गोलियां उसके पेट में लगी थी जबकि एक गोली बाजू पर, एक गोली सिर पर व एक गोली छाती पर लगी थी। इसके अलावा शरीर पर चाकूओं से वार के भी कई निशान थे। सजायाफ्ता चार कैदियों को हाईकोर्ट से छह माह पहले जमानत मिली थी। उनकी जमानत याचिका का विरोध पुलिस ने किया था। मगर बावजूद इसके वह जमानत पाने में कामयाब हो गए थे। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है। - सुरेशपाल, एसएचओ, नारायणगढ़ थाना।

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