[bijnor] - मातमी मजलिसों से माहौल गमगीन

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नजीबाबाद में दरगाह-ए-आलिया नजफ-ए-हिंद जोगीरम्पुरी की सालाना मजलिसों के अंतिम दिन मातमी मजलिसों से माहौल गमगीन रहा। शिया विद्वानों ने कहा कि जब तक दुनिया रहेगी तब तक हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की कुर्बानियां इंसानियत, नेकी और हक के लिए अपना सब कुछ न्योछावर करने का पैगाम देती रहेंगी।

जोगीरम्पुरी दरगाह के शम्सुल हसन हॉल से दीन, इंसानियत और नेकी की राह पर चलने और इस्लाम और दीन को बचाने वालों की कुर्बानियों से सबक लेने के शिया विद्वानों ने मजलिसों के दौरान पैगाम दिए। जोगीरम्पुरी में आयोजित चार रोजा मजलिसों की आखरी मजलिस को देर शाम खिताब करते हुए दिल्ली से आए मौलाना कलवे रूशैद ने कहा कि जब-जब हक और बातिल का जिक्र होगा तब-तब हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों को याद किया जाएगा। जिन्होंने दीन और इस्लाम को बचाने के लिए अपनी और अपने खानदान की परवाह नहीं की।

उन्होंने कहा कि करबला की जंग दुनिया के लिए सबक है। मजलिस को खिताब करते हुए मौलना अहमद रजा ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने अपनी कौम व इंसानियत के लिए जुल्मी बादशाह यजीद के सामने सिर नहीं झुकाया। उन्होंने बेशकीमती कुर्बानी से यजीद की आतंकी सोच का खात्मा किया। मौलाना नियाज मेहदी ने मजलिस को खिताब करते हुए कहा कि इल्म के जरिए ही इंसान दुनिया में तरक्की पा सकता है। इल्म से इंसान में अच्छा-बुरा सोच ने की सलाहियत आती है। नसीमुल बाकरी के संचालन में आयोजित मातमी मजलिस को मौलाना मोहम्मद असगर, मौलाना कौकब मुजतबा, इसरार रजा, मो.अजीम सैंथली, मौलाना हैदर रजा, मौलाना सज्जाद नासिर लखनवी ने भी मजलिस को खिताब किया।

दरगाह कमेटी के सचिव विसाल मेहदी, इसरार जैदी, मिसाल मेहदी, रियाज जैदी, मौज्ज्सि अब्बास शब्लू, अली अशरफ, शब्बीर हैदर की देखरेख में आयोजित मजलसिों के दौरान शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन सय्यद वसीम रिजवी, अपना हक फाउंडेशन की संस्थापिका फरहत नकवी, मायरा नकवी, एमएलए मनोज पारस, सपा नेता जावेद आब्दी सहति कई जन प्रतिनिधियों ने दरगाह की जियारत की।

उधर शनिवार की देर रात तक अंजुमने सौगवार हुसैन मेमन सादात, अंजुमने आब्दिया नौगांवा, अंजुमने सिपाहे अब्बासिया, जुल्फुकारे हैदरी नौगांवा, लश्करे हुसैनी मेमन, अजाय हुसैनी रसूलपुर, अंजुमन इरफाने अजा छजुपुरा, सौगवारे हुसैनी नौगांवा, अंजुमने आले अतहर ने अलम, ताबूत और जुलजनाह के मातमी जुलूस बरामद किए।

शायरों ने बयां कीं इमाम हुसैन की सीरत

नजीबाबाद। दरगाह-ए-आलिया जोगीरम्पुरी में महफिले मकासेदा में शायरों ने हजरत इमाम हुसैन के किरदार पर रोशनी डालते हुए उनकी सीरत बयां की। शम्सुल हसन हॉल में शनिवार की रात तीसरे दिन की मातमी मजलिसों का सिलसिला थमने के बाद महफिले मकासेदा का आयोजन हुआ। मौलाना सय्यद मेहदी ने कलाम पाक की तिलावत के साथ महफिल का आगाज किया। अली इमाम नौगानवी ने नात पेश की। दरगाह कमेटी के सचिव विसाल मेहदी की उपस्थिति में कलीम असगर और अहमद बिजनौरी के संयुक्त संचालम में आयोजित मकासेदा में जाने माने शायरों ने हजरत इमाम हुसैन की सीरत बयां करने के कलाम से सभी का दिल जीत लिया। शायरों ने वाकयाते करबला के शहीदों की जांबाजी को कलाम में ढाला। महफिले मकासेदा में मिकदात सिरसवी, अनवर सैंथली, कलीम असगर, जामिन नौगानवी, आसिफ जलाल, मीसम गोपालपुरी, शब्बर नौगानवी, तकी नौगानवी, नजर कुंदरकी, नसीमुल बाकरी ने कलाम पेश किए।

सीरिया के अंबेसडर ने की जियारत

नजीबाबाद। सीरिया के अंबेसडर मोहम्मद अल गजदी जोगीरम्पुरी दरगाह पहुंचे। उन्होंने दरगाह की जियारत करने के बाद जायरीनों को खिताब करते हुए हजरत इमाम हुसैन की हुसैनियत से सबक लेने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने दुनिया को अमन और शांति का पैगाम दिया। डिप्टी अंबेसडर अलकेंच ने मोहम्मद अल गजदी के खिताब का तर्जुमा किया। दरगाह कमेटी के सचिव विसाल मेहदी जैदी ने सीरिया के अंबेसडर का स्वागत किया।

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