[budaun] - गंगा में तीन और स्नानार्थी डूबे, एक की मौत

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जीवनदायिनी के कछला घाट के एक छोर पर जलस्तर में गहराई ने सोमवार को नहाते समय एक और युवक की जान ले ली। इस बार हादसे का शिकार कासगंज जिले की सोरों कोतवाली के गांव हसनपुर छोटा का उमेश कुमार बना। वह अपने परिवार के तीन सदस्यों के साथ बह गया। साथी दो किशोरों को तो गोताखोरों ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया लेकिन उमेश बह गया। करीब पांच घंटे की मशक्कत के बाद गोताखोरों ने उसके शव को खोज कर बाहर निकाल लिया।

कछला गंगाघाट पर हादसा करीब 11 बजे हुआ। कासगंज जिले में सोरों कोतवाली क्षेत्र के गांव हसनपुर छोटा से प्रधान कल्लू और रमेश के परिवार के लोग गंगा नहाने के लिए पहुंचे। कासगंज जिले के छोर वाले घाट पर नहाते समय कल्लू का 16 वर्षीय बेटा अर्जुन, उसके पड़ोसी बॉबी (17) पुत्र पप्पू और 18 वर्षीय उमेश पुत्र रमेशचंद्र गहरे में चले गए। तीनों डूबने लगे तो घाट पर मौजूद लोगों ने शोर मचा दिया। इस पर गोताखोरों ने अर्जुन और बॉबी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। उमेश के बह जाने से उसका सुराग नहीं लग पाया। इसकी सूचना के बाद उमेश के घरवाले भी रोते-बिलखते घाट पर आ गए। चौकी के पुलिस कर्मियों ने तीन और गोतखोरों को बुलाकर उमेश की खोजबीन शुरू करा दी।

गोताखोरों ने नावों के जरिए भी घाट के आसपास तलाशी अभियान चलाया। तेज बहाव वाले स्थान पर जाल भी डाला गया। करीब पांच घंटे की मशक्कत के बाद उमेश को बाहर निकाल लिया गया लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। प्रधान कल्लू ने बताया कि उमेश के साथ जो युवक थे उनमें दो लोग तो पहले ही नहा कर बाहर निकल चुके थे। शाम को परिजन उमेश का शव लेकर घर चले गए। उमेश की पिछले साल ही शादी हुई थी। परिवार वालों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से भी इंकार कर दिया। बता दें कि गंगा घाट के उत्तरी छोर पर गहराई अधिक होने की वजह से जीवनदायिनी में हादसे बढ़ते जा रहे हैं। रविवार को भी मध्यप्रदेश के मुरैना से परिजनों की अस्थि विसर्जन को पहुचे चार लोग डूब गए थे। इनमें तीन को गोताखोरों ने बचा लिया था।

मुरैना के युवक का दूसरे दिन शव मिला

उझानी। परिजन दर्शनलाल की अस्थियों को गंगा में विसर्जित करने के लिए मध्य प्रदेश के मुरैना से आए गांधी कॉलोनी निवासी दिनेश कुमार पुत्र बैजनाथ भी रविवार को डूब गया था। खोजबीन में जुटे गोताखोरों को दिनेश का शव सोमवार सुबह में करीब नौ बजे लदल में फंसा मिला। गोताखोरों ने उसे बाहर निकाल लिया। शव को देख परिजन बिलख उठे। परिजनों में जितेंद्र ने बताया कि उन्होंने गोतखोर की टीम को तड़के से ही खोजबीन में लगा दिया था। चौकी इंचार्ज प्रमोद कुमार ने बताया कि जितेंद्र ने शव का पोस्टमार्टम कराने से मना कर दिया था। शव उसके हवाले कर दिया गया है।

घाट पर चिह्नित नहीं है गहराई वाले स्थान

उझानी। कछला में गंगा की जलधारा सिकुड़ जाने के बाद जलस्तर का जिस ओर प्रवाह अधिक है, उसी तरफ गहराई भी बढ़ गई है। यह बात नगर पंचायत और राजस्व विभाग के कर्मियों को भी पता है लेकिन पूर्णिमा और मुख्य स्नान पर्वों को छोड़ दें तो बाकी के दिनों में घाट पर खतरा वाले स्थान पर निशान नजर नहीं आते। गहराई वाले स्थानों पर बल्लियां लगाकर लाल निशान लगा दिए जाएं तो बाहर के श्रद्धालुओं को आगे बढ़ने पर जोखिम का अहसास हो जाएगा। हादसों में गिरावट आएगी।

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