[faizabad] - हेरिटेज वॉॅक से जानी अयोध्या की पौराणिकता

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हेरिटेज वॉॅक से जानी अयोध्या की पौराणिकताअयोध्या। जनकपुर से अयोध्या आई मैत्री बस सेवा में सवार नेपाल के दो मंत्रियों व जनकपुर की उपमहापौर समेत 66 सदस्यीय दल रविवार सुबह वापस रवाना हो गया। इसके पहले सभी सरयू स्नान कर हेरिटेज वॉक कर अयोध्या की पौराणिकता से रू-ब-रू हुए। ज्यादातर लोग पहली बार अयोध्या आए थे। वे माता जनकनंदिनी की ससुराल में मिले स्वागत सत्कार से अभिभूत रहे। नेपाल के सुरक्षा मंत्री सरोज कुशवाहा ने जाने से पहले कहा कि बस सेवा जल्द ही यूपी व केंद्र सरकार से बातचीत व रूट तय होने के बाद नियमित हो जाएगी। नेपाल के ज्यादातर लोग अयोध्या आने को हमेशा उत्सुक रहते हैं। अयोध्या पहुंचे जनकपुर का 66 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल रामनगरी में हुए स्वागत से अभिभूत दिखे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 11 मई को जनकपुर से शुरू की गई मैत्री बस सेवा का अयोध्या में 12 मई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भव्य स्वागत किया गया था। रविवार को अयोध्या आए जनकपुरवासियों ने सुबह सरयू स्नान के बाद पूजन-अर्चन किया। इसके बाद हेरिटेज वॉॅक कर रामनगरी की पौराणिकता जानी और शेषावतार मंदिर व चंद्रहरि महादेव मंदिर में भी माथा टेका। मेहमानों ने स्वर्गद्वार, मुक्ति गली समेत अन्य स्थलों का भी भ्रमण किया। अंत में नागेश्वरनाथ मंदिर में जलाभिषेक कर नेपाली प्रतिनिधिमंडल वापस जनकपुर के लिए रवाना हुआ। इस दौरान पर्यटन अधिकारी बीपी सिंह, शोध छात्र सर्वेश कुमार आदि ने जनकपुरवासियों को हेरिटेज वॉक कराकर अयोध्या की पौराणिकता की जानकारी प्रदान की।वहीं, प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई कर रहे नेपाल के प्रदेश नंबर दो सरकार के मंत्री सरोज कुशवाहा ने अयोध्या में भव्य मेहमाननवाजी के लिए भारत को शुक्रिया बोला। कहा कि सरकार ने जो सुरक्षा व सम्मान दिया उससे हम अभिभूत हैं। उन्होंने यहां के लोगों को नेपाल आने का निमंत्रण देेते हुए कहा कि यह अयोध्या की प्रथम यात्रा थी। तिरपाल में भगवान को देखा तो बहुत दुख हुआ : सरोज नेपाल के सुरक्षा मंत्री सरोज कुशवाहा ने कहा कि बहुत आस लगाकर आए थे कि राम जी के मंदिर का दर्शन होंगे। मगर यहां तिरपाल में रखे भगवान को देखा तो, बहुत ही दुख हुआ। कहा कि अयोध्या व जनकपुर को रामायण सर्किट से जोड़ने का काम चल रहा है, बस सेवा भी शुरू कर दी गई है। ऐसे में जो पर्यटक आएंगे वह आशा करेंगे कि भगवान राम का मंदिर देखें, इसलिए राममंदिर का निर्माण होना चाहिए। मैत्री बस सेवा पर कहा कि भारत और नेपाल दो शरीर एक आत्मा हैं। बस सेवा को निरंतरता देना प्राथमिकता है, अभी इसके लिए नीतियां तय करना बाकी है।

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