[moradabad] - महानगर की यही कहानी.. कहने को अमृत-पीने को दूषित पानी

  |   Moradabadnews

महानगर में भूजल दूषित हो गया है। जमीन में गहराई पर जाने पर ही पीने योग्य पानी मिल रहा है। उथले नलों और पंपों का पानी खराब है। फैक्ट्रियों के दूषित पानी और रामगंगा किनारे की ई-डस्ट के कारण भूजल विषाक्त हो रहा है। जल निगम की सैंपल रिपोर्ट में पाया गया है कि उथला पानी बीमारी परोस सकता है।

जिले में लगी ज्यादातर फैक्ट्रियों में जल शोधन संयंत्र नहीं हैं। इनका दूषित पानी सीधे नालों और नदियों में डाला जा रहा है। इसका प्रभाव अब भूजल पर होने लगा है। भूजल प्रदूषित होने से लोगों की सेहत पर खतरा बढ़ता जा रहा है। गनीमत यह है कि अभी तक प्रदूषण की मार पानी में ज्यादा गहराई तक नहीं पहुंची है। ऐसे में गहराई वाले नलों-नलकूपों का पानी पीने में प्रयोग किया जा सकता है, लेकिन उथला पानी पीने योग्य नहीं है। भूजल में प्रदूषण की मार सौ फीट की गहराई तक पहुंच गई है। ऐसे में महानगर में अब नल और पंप 130 फीट से ज्यादा पर ही लगाए जा रहे हैं।

जांच रिपोर्ट के अनुसार बुधबाजार, सिविल लाइन, कांठ रोड, कटघर क्षेत्र, पीतल नगरी क्षेत्र, तहसील स्कूल, नागफनी, जामा मस्जिद, लाल मस्जिद, फराहशान, चूड़ी वाली गली, आवास विकास, महिला थाना क्षेत्र, लाइनपार व मंडी समिति के आसपास का क्षेत्र का पानी उथले स्तर पर पीने योग्य नहीं है। सौ फीट तक का पानी दूषित हैं। जिन नलकूपों-सबमर्सिबल का पानी 130 फीट या इससे ज्यादा से निकल रहा है, वह पीने योग्य है।

यहां पढें पूरी खबर— - http://v.duta.us/y0m2WAAA

📲 Get Moradabad News on Whatsapp 💬