[udham-singh-nagar] - सीट का गणित बदलने से अब हाईकमान बढ़ेगा सिर दर्द

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नगर निगम काशीपुर मेयर पद ओबीसी सामान्य होने से सभी राजनीतिक दलों में उम्मीदवारों की संख्या बढ़ गई है। इससे राजनीतिक दलों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। टिकट नहीं मिलने पर कई बगावत का रुख अपना सकते हैं।

वर्ष 2013 में मेयर पद ओबीसी महिला के लिए आरक्षित था। इससे टिकट के दावेदारों की संख्या काफी कम थी, लेकिन इस वर्ष मेयर पद की सीट ओबीसी सामान्य होने से ओबीसी की महिला और पुरुष चुनाव लड़ सकते हैं। भाजपा में अभी तक मेयर सीट से टिकट के चार दावेदार हैं, लेकिन कांग्रेस में यह संख्या सात है। कांग्रेस में टिकट की दावेदारी को लेकर घमासान मचा है।

कई ने घर-घर जनसंपर्क कर प्रचार भी शुरू कर दिया है। हर कोई पूर्व सांसद केसी सिंह बाबा, पूर्व मंत्री इंदिरा हृदयेश का आशीर्वाद लेने की जोड़तोड़ कोशिश में लगा है। बताया जाता है कि इंदिरा हृदयेश भी काशीपुर में मेयर पद के प्रत्याशियों को लेकर काफी दिलचस्पी दिखा रही हैं।

कांग्रेस के संभावित दावेदार

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एवं पूर्व मंत्री चौधरी समर पाल सिंह की पुत्री मुक्ता सिंह, पीसीसी सदस्य अलका पाल, पूर्व कांग्रेस नगर अध्यक्ष ब्रह्म सिंह पाल, महिला आयोग की पूर्व उपाध्यक्ष इंदूमान, युवक कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश अध्यक्ष आसिफ रजा, खिलाड़ी राजीव चौधरी, शफीक अंसारी और सीमा वर्मा। कांग्रेस की मुक्ता सिंह, अलका पाल, भाजपा की ऊषा चौधरी और खिलेंद्र चौधरी ने जनसंपर्क शुरू कर दिया है।

भाजपा के संभावित दावेदार

अभी तक मेयर पद के लिए पार्टी से टिकट के दावेदारों में निवर्तमान मेयर ऊषा चौधरी, भाजपा किसान मोर्चा के अध्यक्ष खिलेंद्र चौधरी प्रबल दावेदार हैं। उनके अलावा राजेंद्र सैनी और शिक्षा चौधरी भी संभावित दावेदार बताए जाते हैं।

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