[agra] - मथुरा आइये, परिक्रमा लगाइए, बोलिए राधे-राधे

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मथुरा। अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) बुधवार से शुरू हो रहा है। मथुरा में 16 मई से 13 जून तक आस्था का समुंदर उमड़ेगा। बड़ी संख्या में कृष्ण भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है। 15 मई की देर शाम तक हजारों भक्त गोवर्धन में पहुंच गए थे। गोवर्धन की परिक्रमा के साथ ही ब्रज चौरासी कोस की परिक्रमा भी लगाई जाएगी। इस दौरान सभी मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजन होंगे।हर तीसरे साल आने वाला अधिक मास 16 मई से शुरू हो रहा है। इसे पुरुषोत्तम मास और लोंद के महीने के नाम से भी जाना जाता है। इस माह में सभी मांगलिक कार्य वर्जित हो जाने पर ब्रज दर्शन का महत्व माना गया है। ज्योतिषाचार्य कामेश्वर चतुर्वेदी के अनुसार अधिक मास में विवाह, यज्ञोपवीत, गृह प्रवेश, मुंडन सहित सभी मांगलिक कार्य वर्जित रहेंगे। इस मास में ब्रह्म मुहूर्त में जागकर स्नान कर, व्रत रखे और दान करें। भागवत कथा, रामायण पाठ और गीता पाठ करें। भजन संकीर्तन में भाग लें। उधर, आमतौर पर नजर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या इन दिनों यहां कई गुना बढ़ जाएगी। कहते हैं कि इस मास में देवों का वास ब्रज में होता है। भगवत दर्शन के लिए इसीलिए देश भर के श्रद्धालु मथुरा आने लगे हैं। पुरुषोत्तम मास में ब्रज दर्शन को आने वाले श्रद्धालुओं ने पहले से ही यहां होटल और धर्मशालाओं में बुकिंग करा दी हैं। इसके कारण पहले से ही होटल-धर्मशालाएं फुल हो गई हैं।परिक्रमा पर रहेगा श्रद्धालुओं का रुझानब्रज चौरासी कोस की परिक्रमागोवर्धन की सप्तकोसीय परिक्रमातीन वन की इक्कीस कोसीय परिक्रमावृंदावन की पंचकोसीय परिक्रमामथुरा की पंचकोसीय परिक्रमाब्रज 84 कोस परिक्रमा के पड़ावमथुरा महोली, मधुवन, मुकुदवन, शांतनुकुंड, मुखराई, चंद्रसरोवर, जतीपुरा, बहज, डीग, सेहू, खोह, पसोपा, केदारनाथ, कामवन, बरसाना, नंदगांव, बठैनकला, कोटवन, शेषशायी, कोसी, पैगांव, शेरगढ़ चीरघाट, सेही, मांट, वृंदावन, लोहवन, बलदेव, गोकुल, रावल।

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