[deoria] - कृषि मंत्री के गांव में शौचालय बनाने में ‘खेल’

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देवरिया। सूबे के कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही के पैतृक गांव पकहां में शौचालय निर्माण में भारी गोलमाल सामने आया है। वर्ष 2013-14 में गांव में 1082 शौचालयों की मंजूरी मिली थी। धन भी जारी हुआ, लेकिन इनमें से 60 फीसदी शौचालयों का कहीं अता-पता नहीं है। कुछ शौचालय बने भी तो आधे-अधूरे। कहीं टीनशेड की छत है तो कहीं दरवाजा गायब है। चार साल पहले स्वीकृत कई शौचालयों का निर्माण अब आननफानन में कराया गया है। मंत्री सूर्यप्रताप शाही की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच में इस अनियमितता की पोल खुली है।

वर्ष 2013-14 के लोहिया समग्र गांव पकहां में पंचायतीराज विभाग ने 1082 शौचालयों के निर्माण की मंजूरी दी थी। प्रत्येक लाभार्थी को राज्य वित्त से 4600 व मनरेगा से 4500 रुपये दिए गए। लाभार्थी को 900 रुपये अपनी ओर से लगाकर शौचालय निर्माण कराना था। राज्य वित्त से करीब 49 लाख की धनराशि पंचायत को भेज भी दी गई। कुछ शौचालयों का निर्माण हुआ, इसी बीच नियमों में बदलाव करते हुए शासन ने शौचालयों की धनराशि 12 हजार रुपये कर दी। इस बदलाव के साथ ही जिम्मेदार पुरानी व्यवस्था को भूल गए। कितने शौचालय बने, पूरे और इनका इस्तेमाल हो रहा है या नहीं, किसी ने जानने की जरूरत भी नहीं समझी। सूबे में सत्ता परिवर्तन हुआ तो यह मामला खुला है।

ग्रामीणों की शिकायत के बाद कृषि मंत्री ने खुद पिछले दिनों कलेक्ट्रेट सभागार में हुई समीक्षा बैठक में यह मसला उठाया था। मामले से शासन को अवगत कराया था। जांच शुरू हुई तो गोलमाल के ‘खेल’ की पोल परत-दर-परत खुल रही है। पंचायतीराज विभाग के अपर निदेशक राजेंद्र सिंह ने रविवार को गांव में पहुंचकर शौचालयों का सत्यापन किया तो अवाक रह गए। भ्रमण के दौरान 1082 शौचालयों में से महज 395 शौचालय ही धरातल पर पाए गए। इनमें भी अधिकांश अधूरे थे। निर्माण मानक के अनुरूप नहीं था। सोमवार को उन्होंने जिले के विभागीय अफसरों से पूरे प्रकरण में जवाब तलब किया। लिखित बयान के साथ दस्तावेज देखे। जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी की बात स्वीकारते हुए शासन को अवगत कराने की बात कही है।


जिले का वीआईपी गांव है पकहां

पथरदेवा ब्लॉक का पकहां गांव की आबादी करीब छह हजार है। इसकी गिनती जिले के वीआईपी गांव में होती है। प्रदेश सरकार के कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही इसी गांव के है। सपा के जिलाध्यक्ष रामइकबाल यादव का भी यही गांव है। प्रधानी की कुर्सी लंबे समय से सपा जिलाध्यक्ष के ही परिवार में है। लिहाजा पूर्ववर्ती सरकार में सभी अफसरों की निगाहें यहां जमी थीं। किसी भी योजना से संतृप्त करने के लिए पहले इसी गांव का चयन होता था।


जांच में ये खामियां मिलीं

  • स्वीकृत 1082 के सापेक्ष गांव में 395 शौचालय ही धरातल पर हैं। इनका निर्माण भी पूरा नहीं है।

  • योजना वर्ष 2013-14 की है। नियमानुसार कार्य चार साल पहले ही पूरा होना था, मगर अब तक अधिकांश शौचालय अधूरे हैं।

  • पक्की छत के बजाए टीनशेड लगाया गया है। फिनिशिंग का कार्य भी पूरा नहीं है।

  • शौचालयों पर दरवाजे नहीं लगे हैं। उसकी जगह कुछ लाभार्थियों ने साड़ी का पर्दा डाल रखा है।

  • कई शौचालयों में शीट बालू-सीमेंट से जाम मिली, इससे जाहिर हो रहा था कि निर्माण हाल ही में हुआ है।

  • दो गड्ढे की जगह एक गड्ढा खोदकर शौचालय निर्माण की औपचारिकता की गई है।

  • तमाम शौचालयों में कबाड़, भूसा आदि सामान रखे गए हैं, जो उनका उपयोग नहीं होना दिख रहा है।


यह मामला मेरे कार्यकाल का नहीं है। तब मां प्रधान थीं, लिहाजा पूरी जानकारी नहीं है। स्वीकृति के वक्त शौचालय की राशि 10 हजार थी। इसमें 4600 रुपये राज्य वित्त का था। कुछ ही माह बाद 12 हजार रुपये हो गया, जिससे उस योजना से निर्माण रोक दिया गया। सभी काम मानक के अनुरूप हुए हैं। जांच टीम को पूरा सहयोग किया जा रहा है। - अभय यादव, ग्राम प्रधान पकहां।


पकहां गांव में निर्मित शौचालयों की जांच में काफी अनियमितताएं पाई गई है। नियमानुसार काम नहीं हुआ है। तमाम शौचालय अधूरे हैं। कुछ शौचालय बाद में बनाए गए। इन सब बिंदुओं पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इसे शासन को सौंपा जाएगा, वहीं से कार्रवाई होगी। - राजेंद्र सिंह, अपर निदेशक, पंचायतीराज।

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