[faizabad] - राम की पैड़ी का मॉडल स्टडी करेगा आईआईटी रुड़की

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राम की पैड़ी प्लान की स्टडी करेगा आईआईटी रुड़कीफैजाबाद। अयोध्या में राम की पैड़ी के अपग्रेडेशन प्लान की जांच आईआईटी रुड़की से कराई जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर यह निर्णय हुआ। शनिवार को अपने अयोध्या दौरे के दौरान सीएम योगी ने यहां के लिए बनी 36 करोड़ की योजना का काम न शुरू होने पर नाराजगी जताई थी। जिसके बाद अपग्रेडेशन प्लान की मॉडल स्टडी कराने का फैसला हुआ। भगवान राम की जन्मभूमि को उसकी आभा के अनुरूप सजाने-संवारने को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ काफी गंभीर हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद बीते साल 31 मई को पहले दौरे में उन्होंने जहां रामलला के दर्शन कर राममंदिर निर्माण का संकल्प जताया था। उन्होंने केंद्र सरकार की मदद से 350 करोड़ रुपये की योजनाओं का ऐलान भी किया था। इसमें राम की पैड़ी की दुर्दशा को दूर करना भी शामिल था। 36 करोड़ रुपये खर्च कर राम की पैड़ी सरयू की अविरलता के लिए नया अपग्रेडेशन प्रोजेक्ट बना है। इसे साकार करने में सिंचाई विभाग की काबिलियत पर सवाल उठे तो यहां शनिवार को योगी ने पूरे प्रोजेक्ट की मॉडल स्टडी आईआईटी रुड़की से कराने के निर्देश दिए। 33 साल से प्रयास लेकिन नहीं सुधरा जलप्रवाहदरअसल राम की पैड़ी की कल्पना मुख्यमंत्री रहे श्रीपति मिश्र ने की थी। वर्ष 1984-85 में 14 करोड़ की योजना बनी थी। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता मनोज कुमार सिंह ने बताया कि शनिवार को सरयू आरती के बाद मुख्यमंत्री ने 36 करोड़ से राम की पैड़ी के अपग्रेडेशन का प्रोजेक्ट देखा था। बीते 33 सालों से करोड़ों रुपये खर्च होेने के बाद भी पैड़ी में जलप्रवाह सुनिश्चित नहीं हो पाया है। सिवार, घास व गंदगी से पानी सड़ने लगता है। एक तरफ से पानी लिफ्ट कराने पर दूसरे सिरे से ड्रेन नहीं हो पाता। नए प्रोजेक्ट में भी ऐसी खामी न रहे, इसलिए मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रोजेक्ट का मॉडल स्टडी आईआईटी रुड़की सोमवार को भेज दिया है। मेन चैनल में पानी न रुकने पाए, ग्रेवटी स्लोप सही बने इसका अध्ययन किया जाएगा। पैड़ी की खोदाई हो सकती है, इसलिए संवारने का कार्य रोकासिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता मनोज कुमार सिंह ने बताया कि पैड़ी के अपग्रेडेशन कार्य के दौरान पैड़ी के दोनों तरफ के बड़े हिस्से को तोड़ना पड़ेगा, इसलिए यहां संवारने के लिए स्वीकृत 7.82 करोड़ के काम रोका गया है। राजकीय निर्माण निगम से पूरी ड्राईंग मांगी गई है, ताकि जहां टूटने-खोदने की गुंजाईश नहीं हो, वहां काम कराने की इजाजत दी जा सके।

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