[siddharthnagar] - अनुमोदन के बाद भी नहीं मिल रही धनराशि

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2017-18 में माध्यमिक शिक्षा, अतिरिक्त ऊर्जा समेत कई विभागों को नहीं मिली फूटी कौड़ी अमर उजाला ब्यूरो सिद्धार्थनगर। जिला विकास योजना की संरचना के लिए हर वित्तीय वर्ष में विभागों की ओर से प्रस्तुत परिव्यय को प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में अनुमोदित होने के बाद भी धनराशि पूरी नहीं मिल पाती है। इस कारण आवश्यक विकास कार्य भली प्रकार से नहीं हो पा रहे हैं। हाल ही में प्रभारी मंत्री चेतन चौहान की अध्यक्षता में जिला विकास योजना के तहत वर्ष 2018-19 के तहत 366.22 करोड़ रुपये का अनुमोदन किया गया। वहीं बीते वर्ष 2017-18 में विभागों द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव व अनुमोदन के बाद भी अपेक्षाकृत धनराशि नहीं मिल सकी है। इससे अनुमोदन पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं। बीते वर्ष में उद्यान विभाग को 80 लाख, सामुदायिक विकास ग्राम्य विकास का एक करोड़, राजकीय लघु सिंचाई ने 45.26 लाख, अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत का 50 लाख, पर्यटन विभाग का एक करोड़, माध्यमिक शिक्षा का 153.70 लाख, ग्रामीण पेयजल के लिए 179.68 लाख, पूल्ड आवास के लिए 10 लाख, पुष्टाहार, आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण को लेकर 10 लाख, राज्य औद्यानिक मिशन का 80 लाख का अनुमोदन हुआ, पर इन विभागों को फूटी कौड़ी भी नहीं मिली। ग्रामीण स्वच्छता के लिए अनुमोदन 10842.44 लाख मिले 3970.32 लाख,जिला योजना वर्ष 2017-18 में कई विभागों की ओर से प्रस्तुत प्रस्ताव को अनुमोदन तो कर दिया गया, पर अपेक्षाकृत धनराशि न मिलने से उनकी मंशा अधूरी ही रह गई। लघु एवं सीमांत कृषकों को उत्पादकता बढ़ाने के लिए सहायता मद में अनुमोदित 862.50 के सापेक्ष वास्तविक परिव्यय 265.38 लाख, ग्रामीण स्वच्छता के लिए 10842.44 के सापेक्ष 3970.32 लाख, ग्रामीण आवास के लिए 3455.20 के सापेक्ष 1060.84, सड़क एवं पुल के लिए 3596.50 के सापेक्ष 152.12 लाख, प्राथमिक शिक्षा के लिए 840.32 लाख के सापेक्ष 819.08 लाख, कृषि विभाग को 20 लाख के सापेक्ष 8.51 लाख रुपये ही मिल सके। जिला विकास योजना की बैठक में जितनी राशि अनुमोदित की जाती है कोशिश रहती है उतनी राशि विभागों को मिले। अनुमोदित राशि के सापेक्ष कम धनराशि का मिलना उच्चस्तरीय मामला है। - राजेश सिंह, जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी

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