[varanasi] - हर नाव का होगा नंबर, तय होगा किराया

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वाराणसी। गंगा में चलने वाली नावों का अपना एक अलग नंबर होगा। कौन सी नाव किस घाट से संचालित होगी, इसका ब्योरा और नाविक का नाम-पता होगा। साथ ही, एक घाट से दूसरे घाटों के बीच का किराया भी तय होगा। काशी आने वाले सर्वाधिक विदेशी सैलानियों की पहली पसंद नौकायन होती है, लिहाजा नौका संचालन की सुव्यवस्थित नीति तैयार करने में नगर आयुक्त डॉ. नितिन बंसल ने पर्यटन महकमे से भी सुझाव मांगें हैं। पर्यटन महकमे और जिला प्रशासन के सुझावों के आधार पर नगर निगम प्रशासन नौका संचालन की गाइड लाइन को अंतिम रूप देगा।गंगा में नौका संचालन की कोई नीति-नियम न होने से न सिर्फ मनमाना किराया वसूली की शिकायतें सामने आती हैं बल्कि वर्चस्व की होड़ में नाविकों में भी आए दिन विवाद होते रहते हैं। सुरक्षा संबंधी आशंकाएं बनी रहती हैं सो अलग। इन हालात में सबसे अधिक दिक्कत बाहर से आने वाले सैलानियों, श्रद्धालुओं को होती है। नगर निगम की तरफ से अब तक बिना किसी सुव्यवस्थित गाइड लाइन के ही हर साल नावों का पंजीयन कर उन्हें 12 महीने का लाइसेंस दे दिया जाता था। बिना किसी नियम-शर्त के जारी इस व्यवस्था की जानकारी होने पर मौजूदा नगर आयुक्त ने इस पर रोक लगा दी। उनके निर्देशन में नौका संचालन के नियम-कानून तय किए जा रहे हैं। इसके तहत बिना लाइसेंस के कोई भी नाव गंगा में संचालित नहीं होगी। सभी नावों का अपना नंबर होगा। वे किस घाट से संचालित होंगी, यह भी तय होगा। इसी आधार पर नाविक के नाम-पते की पूरी तस्दीक के बाद उनका रजिस्ट्रेशन होगा। डॉ. नितिन बंसल, आयुक्त, नगर निगम ने बताया कि गंगा में नावों के संचालन की सुव्यवस्थित गाइड लाइन बहुत जरूरी है। रजिस्ट्रेशन, सुरक्षा, किराया, संचालन का स्थान आदि सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए नियम-प्रावधान तय किए जा रहे हैं। निर्धारित मानकों के आधार पर ही लाइसेंस जारी किया जाएगा।

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