👉वाजपेयी की तर्ज पर भाजपा🌷 को मिल सकता है सरकार बनाने का😲 मौका?

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कर्नाटक में त्रिशंकु विधानसभा में बीजेपी (104 सीट) सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। इस बीच कांग्रेस और जेडीएस ने मिलकर 118 विधायकों के समर्थन से सरकार बनाने का दावा पेश किया है। लेकिन फैसला राज्‍यपाल वजुभाई वाला को करना है कि वह किस दल को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करें। हालांकि 1996 में राष्‍ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने अटल बिहारी वाजपेयी को सरकार बनाने के लिए बुलाया था।

543 सदस्‍यीय लोकसभा में उनके पास सर्वाधिक 194 सांसदों का समर्थन था। लेकिन 13 दिन बाद उनकी सरकार गिर गई थी। सुप्रीम कोर्ट के जजों की अध्‍यक्षता वाले दो आयोगों ने भी कुछ ऐसी ही नजीर पेश की है जिसका अब तक पालन होता आया है।

इस आयोग का गठन जून 1983 में हुआ था। केंद्र सरकार ने जस्टिस आरएस सरकारिया के नेतृत्‍व में इस आयोग का गठन किया था। आयोग का काम राज्‍य और केंद्र सरकार के बीच सत्‍ता के संतुलन और तालमेल का परीक्षण करना था। आयोग ने प्रस्‍ताव किया था कि जब मुख्‍यमंत्री का मामला हो तो राज्‍यपाल को इस आधार पर फैसला लेना चाहिए।

1- कोई दल या दलों का गठबंधन, जिसे विधायिका में ज्‍यादा समर्थन मिला हो, को सरकार बनाने के लिए बुलाना चाहिए।

2- राज्‍पाल का दायित्‍व है कि वह देखे कि सरकार बन रही है, न कि ऐसी सरकार बनाने की चेष्‍टा करे जो उसकी नीतियों का पालन करने वाली हो।

3- अगर किसी दल के पास बहुमत नहीं है तो राज्‍यपाल इन आधारों पर फैसला ले सकते हैं:
क) चुनाव पूर्ण गठबंधन को सरकार बनाने का न्‍योता दे सकते हैं
ख) सबसे बड़ी पार्टी जो बहुमत जुटा सकती है
ग) चुनाव बाद गठबंधन जिसके पास बहुमत हो
घ) चुनाव बाद गठबंधन जिसमें सरकार को बाहर से समर्थन मिल रहा हो

इस आधार पर सरकार बनाने वाले दल को 30 दिन के भीतर विधानसभा में विश्‍वास मत हासिल करना होगा। इस मामले में राज्‍यपाल को किसी विश्‍वास मत से संबंधित जोखिम पर भी गौर करना चाहिए।

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