[almora] - आईएएस के तौर पर महिला शिक्षा को बढ़ावा देने का प्रयास करूंगी: अपूर्वा

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अल्मोड़ा। आईएएस में सफलता प्राप्त करके 39वीं रैंक हासिल करने वाली अल्मोड़ा की खोल्टा मोहल्ला निवासी अपूर्वा पांडे का कहना है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा में रहते हुए वह महिला शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रयास करेंगी। उन्होंने कहा कि बालिकाओं को अच्छी शिक्षा देनी जरूरी है। उन्होंने कहा कि आईएएस जैसी परीक्षा में सफलता के लिए धैर्य की बहुत जरूरत होती है। कई बार तुरंत सफलता नहीं मिलती, लेकिन ऐसी स्थिति में आत्मविश्वास नहीं खोना चाहिए।

अमर उजाला से खास बातचीत में अपूर्वा ने कहा कि महिलाओं को शिक्षित किया जाए तो वह किसी भी क्षेत्र में नाम कमा सकती हैं। इसलिए बालिकाओं को शिक्षित करना जरूरी है। उन्होंने बेटों की तरह ही बेटियों को भी शिक्षित करने पर जोर दिया। अपूर्वा ने कहा कि आईएएस के तौर पर वह खुद भी महिला शिक्षा को बढ़ावा देने और महिला सशक्तीकरण के लिए अपने स्तर से भी काम करेंगी। उन्होंने कहा कि तमाम कानून बन जाने के बावजूद महिला उत्पीड़न की घटनाएं होती रहती हैं। इस स्थिति के चलते महिलाओं को आत्मरक्षा के प्रति भी सजग होने की जरूरत है। अपूर्वा का कहना है कि उत्तराखंड ही नहीं पूरे देश में हर रोज सड़क दुर्घटनाओं में सैकड़ों लोग मारे जाते हैं। ऐसे में यातायात नियमों का सख्ती से पालन और अनुशासन का पालन किए बगैर दुर्घटनाओं में रोक लगाना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि बतौर आईएएस वह यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने भी जोर देंगी।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि आईएएस की परीक्षा में सफलता के लिए सभी विषयों का गहराई से अध्ययन करना होता है। इस परीक्षा में सफलता के लिए कठिन परिश्रम के साथ ही धैर्य की भी जरूरत होती है। उन्होंने उस कथन को सही ठहराया कि मनुष्य जैसा सोचता है वैसा ही बन जाता है। उन्होंने एक दिन सोच लिया था कि आईएएस बनना है और अंतत: उन्हें सफलता हासिल हुई। अपूर्वा ने बताया कि वह मकेनिकल इंजीनियरिंग से बीटेक हैं, लेकिन आईएएस में उन्होंने राजनीति विज्ञान और इंटरनेशनल रिलेशनशिप को वैकल्पिक विषय के तौर पर चुना था।

महिलाओं में क्षमता की कमी नहीं, उन्हें अच्छी शिक्षा देनी जरूरी

बोली आईएएस जैसी परीक्षा के लिए धैर्य की बहुत जरूरत

आईएएस अपूर्वा पांडे की अमर उजाला से खास बातचीत

तृप्ति और सौम्या की सफलता से भी मिली प्रेरणा

अल्मोड़ा। अपूर्वा ने बताया कि सिविल सेवा में अल्मोड़ा निवासी तृप्ति भट्ट और सौम्या गुरुरानी की सफलता से भी उन्हें काफी प्रेरणा मिली। वह बोलीं अल्मोड़ा उनका घर और जन्म स्थली है इसलिए यहां से उनका बचपन से ही काफी लगाव रहा है। वह समय-समय पर अल्मोड़ा आती रहती हैं। अपूर्वा का कहना है कि आईएएस में वह उत्तराखंड कैडर को प्राथमिकता देंगी। अपने राज्य में सेवा करने में उन्हें अच्छा महसूस होगा।

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