[bageshwar] - बार्डर में तैनात बेटों की कुशल क्षेम के लिए नापते हैं 30 किमी की दूरी

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बागेश्वर। संचार क्रांति के इस दौर में इंटरनेट ने जहां पूरी दुनिया लोगों की मुट्ठी में सीमित कर दी है, वहीं जिले के सबसे अधिक जांबाज देश को देने वाला गांव आज भी संचार सेवा के लिए बांट जोह रहा है। संचार सेवा नहीं होने से परिजनों को सीमा पर तैनात अपने बेटों का हाल जानने के लिए 30 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है।

जिला मुख्यालय में सार्वजनिक क्षेत्र की बीएसएनएल सहित तमाम निजी कंपनियों ने फोर जी सेवा शुरू कर दी है, लेकिन इसी जिले के गोगिना, रातिरकेठी, मल्खाडुंगर्चा, कीमू गांवों में संचार की कोई सुविधा नहीं है। यह ऐसे गांव हैं जिसने देश को सबसे अधिक जांबाज दिए हैं। आज भी यहां के दर्जनों युवा भारतीय सेना, अर्द्धसैनिक बलों में तैनात हैं। जम्मू कश्मीर, असम, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, डोकलाम में तैनात सैनिकों के माता-पिता आदि परिजन गांवों में रहते हैं। इन बूढ़े मां-बाप को सीमाओं पर तैनात बेटों से बातचीत करने के लिए 25 से 30 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है, लेकिन बरसात में इन गांवों को जोड़ने वाली सड़कें बंद हो जाती हैं। ऐसे में ग्रामीणों को कई बार मायूस होकर वापस लौटना पड़ता है। इससे यह दूरी और अधिक बढ़ जाती है। गोगिना के क्षेत्र पंचायत सदस्य जसपाल सिंह रौतेला ने बताया कि बागेश्वर, पिथौरागढ़ जिलों की सीमा पर स्थित गांवों में नेटवर्क नहीं आता है। जिन लोगों ने लीती, शामा में बीएसएनएल के टावर लगने के बाद मोबाइल फोन लिए थे, वह फोन सिग्नल न आने से शोपीस बने हैं। यहां के लोगों को परिजनों से बातचीत करने के लिए 30 किमी दूर शामा जाना पड़ता है। यही स्थिति जिले के मल्ला दानपुर क्षेत्र की भी है। यहां गढ़वाल की सीमा से लगे कुंवारी, खाती आदि गांवों के लोग संचार सुविधा से महरूम हैं। यहां के लोगों को भी संचार सेवा का लाभ उठाने के लिए धूर, कर्मी या फिर तहसील मुख्यालय कपकोट पहुंचना पड़ता है। इसके लिए कुछ लोगों को 50 से 60 किमी तक का सफर करना पड़ता है।

लोकसभा चुनाव में दबाएंगे ‘नोटा’

बागेश्वर। गोगिना के क्षेत्र पंचायत सदस्य जसपाल सिंह का कहना है कि वर्ष 2012 से लगातार संचार सेवा की मांग उठाई जा रही है। जिला प्रशासन से लेकर सांसद से गुहार लगाई जा चुकी है। अब तक केवल कोरे आश्वासन मिले हैं। करीब 12 हजार की आबादी का कोई सुधलेवा नहीं है। इस उपेक्षा से खिन्न होकर अब क्षेत्र की जनता ने 2019 में होने वाले लोक सभा चुनावों में नोटा (नन ऑफ द एबव ) का बटन दबाने का फैसला लिया है।

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