[bareilly] - आंधी तूफान में मरने वालों की लाशों की बेकदरी

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आंधी-तूफान में जान गंवाने वालों की लाशों को एंबुलेंस और स्ट्रेचर तक नसीब नहीं हुए। पोस्टमार्टम हाउस पर स्ट्रेचर नहीं मिलने पर लाश के नीचे डंडों को फंसाकर लाया गया। एक बार तो लाश फिसलकर नीचे गिर गई। स्टाफ ने दोबारा नीचे डंडा फंसाया और उठाकर अंदर तक ले गया। मृतकों की लाशों की यह दुर्दशा यहीं तक सीमित नहीं रही। आपदा के बाद डीएम वीरेंद्र कुमार ने पोस्टमार्टम हाउस पर जायजा लेेने के बाद सरकारी एंबुलेंस सहित सभी सुविधाओं का एलान किया था, लेकिन यह हवा हवाई साबित हुआ। कुछ शव तो ठेले पर पोस्टमार्टम हाउस तक लाए गए।

रविवार रात भयंकर तूफान में जान गंवाने वालों की संख्या 12 हो गई है। डीएम ने शवों को सरकारी वाहन से पहुंचाने के आदेश दिए थे। जिला अस्पताल में शव वाहन होने बावजूद तूफान में मरने वाले सोनू का शव पोस्टमार्टम हाउस तक पहुंचाने के लिए वाहन नहीं मिला। सोनू शर्मा मजदूरी करत थे। जवान बेटे की मौत से गरीब मुन्ना लाल बेहाल थे। कई घंटों तक शव वाहन नहीं मिला तो उन्होंने 800 रुपये उधार लेकर प्राइवेट एंबुलेंस की व्यवस्था की। तूफान में सड़क पर पेड़ गिरने से हादसे का शिकार हुए लक्ष्मण के शव को ठेले पर रखकर पोस्टमार्टम हाउस तक लाया गया। लक्ष्मण के भाई वीर सिंह के मुताबिक, शव वाहन नहीं मिलने पर ठेले वाले को पांच सौ रुपये देकर शव पोस्टमार्टम हाउस तक लाए।

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