[gonda] - ग्रामीणों के विरोध के बावजूद 97 करोड़ से हो रहा नए बांध का निर्माण

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ग्रामीणों के विरोध के बावजूद बन रहा रिंग बांधकरनैलगंज(गोंडा)। जून का महीना जैसे-जैसे नजदीक आता जा रहा वैसे वैसे बाढ़ प्रभावित गांवों के ग्रामीणों की धड़कन बढ़ती जा रही है। एक तरफ घाघरा नदी में पहाड़ी नालों एवं बरसात के पानी से पानी का स्तर बढ़ने लगा है। वहीं करनैलगंज तहसील क्षेत्र के गांव को बाढ़ से बचाने के लिए पिछले एक साल से चल रही कवायद अभी वहीं की वहीं है। बाढ़ से बचाने के लिए बांध का निर्माण कराने वाली कार्यदायी संस्था सिंचाई विभाग के आला अधिकारी तीन गांव के अस्तित्व को मिटाकर पुराने बांध से करीब एक किलोमीटर दूर नए बांध का निर्माण कराने पर अड़े हुए हैं। वहीं ग्रामीण अपनी जमीन, अपना गांव, घर छोड़ने को तैयार नहीं है। जिससे नकहरा गांव के सामने बाढ़ का खतरा बरकरार है। पिछले वर्ष क्षेत्र में आई बाढ़ के बाद क्षेत्र का दौरा करने आए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा नए बांध का निर्माण करा कर क्षेत्र को बाढ़ से बचाने के लिए आश्वासन दिया था। उसके बाद सिंचाई विभाग द्वारार पुराने कटे हुए बांध के हिस्से से एक किलोमीटर दूर ग्राम बेहटा, नकहरा, काशीपुर को बांध के अंदर करके बांध का निर्माण कराने का नक्शा स्वीकृत कराया गया। जहां पिछले दो महीने से बांध बनाने की प्रक्रिया चल रही है। ग्राम बेहटा व काशीपुर के पास तमाम ग्रामीणों से सिंचाई विभाग जमीन भी अधिग्रहित कर चुका है। जहां बांध का निर्माण चल रहा है, मगर ग्राम नकहरा जहां पिछले वर्ष बांध का हिस्सा कटा था उस गांव के ग्रामीणों का विरोध कार्यदाई संस्था को झेलना पड़ रहा है। जिसकी वजह से बांध का निर्माण जून के महीने तक भी हो पाना संभव दिखाई नहीं दे रहा है। ग्राम नकहरा के तीरथराम यादव, रामतेज, प्रदीप यादव, विजय कुमार एवं लालजी के साथ अन्य ग्रामीणों का कहना है कि कहने को तो उन्हें बाढ़ विभीषिका से बचाने के लिए एल्गिन-चरसड़ी बांध का निर्माण कराया गया था। मगर यह बांध हमारे लिए मुसीबत बन चुका है। बांध बनने से पहले बाढ़ से इतना नुकसान नहीं होता था, जितना बांध कटने के बाद हो रहा है। उस समय फसल भी अच्छी होती थी, मगर बांध कटने के बाद पूरी फसल बरबाद हो जाती है। वर्ष 2007 से 2017 तक बांध को बचाने के लिए पानी की तरह सरकारी धन बहाया गया। मगर बाढ़ आने से पहले बचाव कार्य पूरा नहीं हो सका। जिससे बांध को कटने से नही रोंका जा सका। ग्राम नकहरा के पूर्व प्रधान जगजीवन यादव कहते हैं कि उन्होंने अपनी गाढ़ी कमाई के लाखों रुपये की लागत से अपने मकान का निर्माण कराया था। मगर सिंचाई विभाग के अधिकारी उनके मकान के साथ ही उनकी 6 एकड़ भूमि को घाघरा नदी की धारा में धकेलने का प्रयास कर रहे हैं। ग्राम नकहरा के प्रधान प्रतिनिधि महेश कुमार गुप्त कहते हैं कि सिंचाई विभाग यदि अपने प्रोजेक्ट के अनुसार रिंग बांध का निर्माण कराना चाहता है। तो पूरे गांव के लोगों को उसे पहले कहीं बसाना होगा। साथ ही बांध व नदी के बीच में आने वाली संपूर्ण कृषि योग्य भूमि का मुआवजा भी देना होगा। ऐसा न करने पर न तो हम उसे अपनी भूमि देंगे, और न ही बांध का निर्माण ही होने दिया जाएगा। एसडीएम माया शंकर यादव का कहना है कि जिलाधिकारी ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया है कि ग्रामीणों का हित देखते हुए ही नया बांध बनाने की कार्रवाई अमल में लाई जाय। निर्माण बहुत तेजी से चल रहा है तथा ग्राम नकहरा के पास ग्रामीणों का विरोध होने के कारण निर्माण कार्य अभी नहीं शुरू हुआ है। ग्रामीणों का विरोध यदि जारी रहा तो नकहरा के पास बांध बनाना मुश्किल होगा। जिस तरह अधिकारियों का निर्देश होगा। उस तरह कार्य होगा। -अमरेश कुमार सिंह, सहायक अभियंता सिंचाई विभाग 2017 में सरकारी आंकड़ेबाढ़ प्रभावित गांव 461, कुल प्रभावित जनसंख्या 93 हजार, कुल प्रभावित पशुओं की संख्या 46 हजार, प्रभावित क्षेत्रफल 8433 हेक्टेयर, बाढ़ के दौरान खर्च हुए सरकारी धन 7 करोड़ 21 लाख रुपये।

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