[hapur] - दो अप्रैल कांड में मोनू की जमानत, अभी रिहाई नहीं

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दलित उपद्रव कांड में पूर्व मंत्री के पुत्र को जमानत, अभी रिहाई नहीं हापुड़। दो अप्रैल को शहर में हुए बवाल में गिरफ्तार पूर्व मंत्री के पुत्र मनीष उर्फ मोनू की जमानत हो गयी है। लेकिन अभी रिहाई नहीं होगी क्योंकि जीआरपी के मुकदमों में जमानत अर्जी पर निर्णय नहीं हो सका है। उधर इस जमानत के बाद मोनू पर रासुका लगाने का इरादा विफल होने से पुलिस महकमे को कड़ा झटका लगा है। इस मामले में पुलिस कप्तान की ओर से कड़ी कार्यवाई भी हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट के एससी/एसटी एक्ट में कुछ संसोधन के मामले को लेकर दलित समाज द्वारा दो अप्रैल को किये गये देश व्यापी बंद के आह्वान पर हापुड़ में बंद के दौरान हुई हिंसा के मामले में पूर्व मंत्री स्व. धर्मपाल सिंह के पुत्र मनीष उर्फ मोनू को भी गिरफ्तार किया गया था। मोनू को अब एडीजे फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम की अदालत से जमानत मिल गयी है। शासकीय अधिवक्ता देवेन्द्र खरे ने इसकी पुष्टि की। हालंाकि मोनू के परिवारिक सूत्रों ने बताया कि अभी उसकी रिहाई नहीं हुई है क्योंकि जीआरपी के मुकदमे में जमानत अर्जी पर अभी निर्णय नहीं हो सका है। वैसे मंगलवार को गाजियाबाद में एडीजे कोर्ट में सुनवाई होनी थी लेकिन वकीलों की हाईकोर्ट बैंच को लेकर हड़ताल के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। जीआरपी के मामले में 9 मई को लोअर कोर्ट से जमानत खारिज हो गयी थी। मोनू की जमानत होने पर उनके परिवार और रिश्तेदारों को राहत मिली है लेकिन पुलिस महकमे की नींद उड़ गयी है। दरअसल दो अप्रैल के कांड को लेकर पुलिस प्रशासनिक अफसरों ने मोनू समेत करीब एक दर्जन लोगों को इस कांड के लिए जिम्मेवार ठहराया था। इस मामले में यह भी आरोप था कि अफसरों पर राजनैतिक दवाब भी पड़ रहा था। हालांकि इसका कोई प्रमाण सामने नहीं आया। इतना जरूर है कि दो अप्रैल के कांड को अगर पु्िलस के आला अफसर गंभीरता से लेते तो इस मामले में रासुका की कार्यवाई की जा सकती थी। लेकिन निचले स्तर के पुलिस अधिकारी पता नहीं क्यों चुप्पी साधे रहे। आला अफसरों को यह भी भनक नहीं लगी कि मोनू की जमानत अर्जी डल गयी है और उसकी जमानत होने वाली है। परिणामस्वरूप सोमवार को मोनू की धारा 307 आईपीसी के मामले में जमानत होने का पता मंगलवार को पुलिस अधिकारियों को चला । इस संबंध में पुलिस अधीक्षक संकल्प शर्मा ने बताया कि इस मामले में जानकारी कर रहे हैं, उसी के बाद कुछ कहेंगे। बेशक पुलिस कप्तान ने कोई जानकारी नहीं दी हो लेकिन माना यह जा रहा है कि इस मामले में सख्त कार्यवाही हो सकती है। कोतवाल पंकज लवानिया का कहना है कि मामला अदालत का है, वह इसमें क्या कर सकते हैं।

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