[kotdwar] - कलश यात्रा के साथ रिखणीखाल महोत्सव का हुआ आगाज

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कोटद्वार। रिखणीखाल महोत्सव मंगलवार को कलश यात्रा के साथ शुरू हो गया। पहले दिन महिला मंगल दल की टीमों ने गढ़वाली लोक संस्कृति की प्रस्तुतियों से समा बांध दिया। पलायन पर प्रस्तुत किए गए नाटक ने दर्शकों को सोचने पर मजबूर किया। जीआईसी रिखणीखाल प्रांगण में आयोजित महोत्सव का लैंसडौन के विधायक दिलीप रावत ने दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। उन्होंने महोत्सव को एक ऐतिहासिक पहल बताया। कहा कि सामाजिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक सामंजस्य को बनाए रखने का महोत्सव एक मात्र माध्यम है। उन्होंने क्षेत्रवासियों से गढ़वाल की धरोहर को बचाने के लिए आगे आने की अपील की। महोत्सव के पहले दिन के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत जीआईसी व शिशु मंदिर की छात्राओं की सरस्वती वंदना और स्वागत गीत के साथ हुई। प्राथमिक विद्यालय सेंधी द्वारा पलायन पर नाटक की प्रस्तुति ने खूब तालियां बटोरी। छात्र-छात्राओं ने चैता की चैत्वाली.. गीत पर सुंदर नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को झूमने पर मजबूर किया, वहीं महिला मंगल दल डाबरी की सदस्यों ने थड़िया-चौफला लोक नृत्य प्रस्तुत कर गढ़वाली लोक संस्कृति की छटा बिखेरी। जितेंद्र नवानी की गढ़वाली गजल और मनमोहन गौनियाल के लोकगीत ने भी खूब तालियां बटोरी। इस अवसर पर क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों की चित्रकला, निबंध, कविता पाठ और वालीबाल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। यूथ फाउंडेशन द्वारा आयोजित सैन्य प्रशिक्षण के लिए 136 युवाओं में से कुल 26 युवाओं का प्रशिक्षण के लिए चयन किया गया। महोत्सव में लगे कृषि, स्वास्थ्य, जिला विधिक सेवा, समाज कल्याण, बाल विकास, विज्ञान प्रदर्शनी सहित सोलह स्टॉलों का लोगों ने लाभ उठाया। इस अवसर ब्लॉक प्रमुख लक्ष्मी देवी, सतेंद्र रावत, जेष्ठ उपप्रमुख यशोदा देवी, कनिष्ठ उपप्रमुख रेवत सिंह, महोत्सव संयोजक संयोजक देवेश रावत, धीरज मणि, बीरेंद्र सिंह आदि मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन धनपाल सिंह रावत और विकास देवरानी ने किया।

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