[lucknow] - कर्नाटक के नतीजों में यूपी के लिए संदेश, मजबूत होगी सपा-बसपा सहित भाजपा विरोधियों की दोस्ती!

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उत्तर प्रदेश भले ही कर्नाटक से सैकड़ों किलोमीटर दूर हो पर, राम भक्त हनुमान की जन्मस्थली दक्षिण भारत की इस धरती के विधानसभा चुनाव के नतीजे राम की जन्मस्थली के सियासी समीकरणों पर असर डाले बिना नहीं रहेंगे। इन समीकरणों का लोकसभा चुनाव में तो असर दिखाई ही देगा लेकिन इसी महीने कैराना व नूरपुर के उपचुनाव में भी खासा प्रभाव दिख सकता है।

बहुजन समाज पार्टी ने अभी तक कैराना और नूरपुर के उप चुनाव में तटस्थ रहने की नीति का संकेत दिया है लेकिन बदली परिस्थितियों में वह रालोद और सपा के पक्ष में खड़े होने का फैसला ले लें तो ताज्जुब नहीं होगा। कारण, गोरखपुर व फूलपुर के उप चुनाव में बसपा ने त्रिपुरा के नतीजों के बाद ही सपा के समर्थन की घोषणा की थी।

कर्नाटक में 2013 के मुकाबले भाजपा को 64 सीटों की बढ़ोतरी और 2008 के बाद दक्षिण भारत के प्रवेशद्वार कहे जाने वाले इस राज्य में सीटों का आंकड़ा सौ से ऊपर पहुंचना तथा एससी व एसटी बहुल इलाकों में मिली सफलता उपलब्धि और राहत है। पर, कांग्रेस और जनता दल सेकुलर अगर चुनाव के पहले मिल गए होते तो परिणाम बदल सकते थे। इसी संकेत ने उत्तर प्रदेश में भाजपा की चुनौती बढ़ा दी है।

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