[mau] - पात्रों की जगह शामिल कर रहे अपात्रों के नाम

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जिले में राशन कार्डों को आधार से लिंक करने के दौरान पात्र गृहस्थी सूची में पात्रों की जगह अपात्रों के नाम शामिल किए जा रहे। ऐसे में विभाग की ओर से नाम हटाने की जानकार लाभार्थियों को दो तीन माह बाद दी जा रही है। कोटेदारों की मिली भगत के चलते राशन माफिया गरीबों के हक पर डाका डाल रहे। जबकि शिकायतकर्ता विभाग का चक्कर लगाने को मजबूर है और उसकी सुनवाई नहीं हो रही।

जिले में नगरीय क्षेत्र के पात्र गृहस्थी के 58 हजार 156 कार्ड और लाभार्थी दो लाख 84740 हैं। जबकि ग्रामीण क्षेत्र में दो लाख 52 हजार 753 कार्ड और 11 लाख 51 हजार 845 लाभार्थी हैं। इसके अलावा नगरीय क्षेत्र में 7580 अन्त्योदय कार्ड और 31 हजार 138 लाभार्थी हैं। जबकि पात्र गृहस्थी की संख्या 49 हजार चौदह तथा लाभार्थियों की संख्या एक लाख 93 हजार 53 है। इन दोनों श्रेणियों के कार्डधारकों का आनलाइन आवेदन वर्ष 2015 से लेकर अब तक चार बार भरे जा चुके हैं। हर बार जब भी नई सूची जारी होती है तो पात्रों का नाम हटाकर उसी क्रमांक नंबर पर अपात्रों के नाम शामिल करने की शिकायतें आती हैं।

जिलापूर्ति अधिकारी कार्यालय पर रोजाना ऐसे शिकायत कर्ताओं का हुजूम देखा जा सकता है। इन शिकायतों को लेकर कलेक्ट्रेट पर अक्सर धरना प्रदर्शन भी होता रहता है। ग्राम प्रधानों और कोटेदारों पर अपने चहेते अपात्रों को पात्र गृहस्थी सूची में नाम शामिल कराने के आरोप लगते रहते हैं। लेकिन ऐसी शिकायतों का सिलसिला थमने के बजाए बढ़ता ही जा रहा है। इंदारा गांव की शीला बताती हैं कि शुरु से उनका नाम पात्र गृहस्थी सूची में था। कई बार के सत्यापन में नाम सही पाया गया लेकिन बाद में उसका नाम सूची से हटा दिया गया है। वहीं, सहुआरी की कुसुमावती कहती हैं कि उसके नाम की जगह एक नौकरीपेशा व्यक्ति की औरत का नाम शामिल कर लिया गया है। महुआर गांव की सावित्री और कटवांस की बसंती की भी कुछ ऐसी ही शिकायतें हैं। लोगों का कहना है कि यह खेल बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।

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