[pilibhit] - ओवर स्पीड पर कटेगा इलेक्ट्रानिक्स चालान

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खेकड़ा (बागपत)। दिल्ली को प्रदूषण से निजात दिलाने के लिए बन रहा ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे 500 दिन में बनकर तैयार होगा। मंगलवार को बडे़ अधिकारियों ने एक्सप्रेस वे का निरीक्षण कर 20 मई तक हर हाल में कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। सीजीएम बीएस सिंगला ने बताया गति सीमा से अधिक तेजी से चलने वाले वाहनों का इलेक्ट्रानिक चालान काटा जाएगा और वह लोगों को टोल के साथ ही जोड़कर भेजा जाएगा। नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के चीफ जनरल मैनेजर (सीजीएम ) बीएस सिंगला ने मंगलवार को खेकड़ा क्षेत्र में निर्माणाधीन पेरिफेरल हाइवे पर पहुंचे। उन्होंने इंजीनियरों और ठेकेदारों को निर्देश देकर कहा काम हर हाल में 20 मई तक पूरा हो जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि सरकार ने एक्सप्रेस वे के निर्माण के लिए 910 दिन का समय दिया, लेकिन अब यह उससे आधे वक्त में ही बनकर तैयार होने वाला हैं। मई माह के अंत में 26 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी एक्सप्रेसवे का उद्घाटन कर सकते हैं। करीब 135 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे पलवल, गाजियाबाद और नोएडा को सीधे तौर पर जोड़ेगा। इससे हरियाणा से यूपी और यूपी से हरियाणा जाने वाले वाहनों को दिल्ली से होकर नहीं गुजरना होगा। इसे देश का सबसे तेज एक्सप्रेस वे कहा जा रहा है, क्योंकि यहां वाहनों को 120 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलने की अनुमति होगी। इसके चलते सफर का समय कम होगा और दिल्ली में वाहनों के चलते होने वाले प्रदूषण में भी कमी आएगी। ओवरलोड वाहनों को नहीं मिलेगी एंट्री सीजीएम बीएस सिंगला ने बताया कि इस एक्सप्रेस वे की खासियत यह होगी कि इसमें आपको सिर्फ उतना ही टोल चुकाना होगा, जितनी दूरी का सफर आप तय करेंगे। यही नहीं, इस पर टोल कलेक्शन की इलेक्ट्रानिक व्यवस्था होगी, ताकि ट्रैफिक का मूवमेंट बाधित न हो। सिंगला ने कहा कि इसके अलावा हमने एक्सप्रेसवे के सभी एंट्री पाइंट पर ऐसे सेंसर लगाए हैं, जिनसे किसी भी ओवर लोड वाहन के बारे में पता चल सकेगा और उन्हें एक्सप्रेसवे पर एंट्री नहीं मिलेगी। आमतौर पर टोल प्लाजा पर इस तरह के सेंसर लगाए जाते हैं और वाहनों के ओवरलोड पाने पर उन्हें वापस कर दिया जाता है लेकिन, इस एक्सप्रेसवे में एंट्री पाइंट पर ही ऐसे सेंसर होंगे ताकि ओवरलोड वाहन एंट्री ही न कर सकें। सिंगला ने बताया एक्सप्रेसवे के पास पार्किंग की सुविधा भी दी है ताकि ओवर लोड ट्रक वहां पर अपना सामान उतार सकें और फिर निश्चित वजन के साथ ही आगे का सफर तय करें। यह देश में अपनी तरह का पहला प्रयोग है। उन्होंने कहा कि वाहनों की गति को नियंत्रित रखने के लिए हर दो किलोमीटर की दूरी पर कैमरे लगाए गए हैं। सिंगला ने कहा कि गति सीमा से अधिक तेजी से चलने वाले वाहनों का इलेक्ट्रानिक चालान काटा जाएगा और वह लोगों को टोल के साथ ही जोड़कर भेजा जाएगा। ओवर स्पीड चलने वाले लोगों पर इससे लगाम कसी जा सकेगी।

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