[sitapur] - समसामयिक रचनाएं सुनाकर श्रोताओं का गुदगुदाया

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‘कोई नहीं सरहद के सिपाही से बड़ा है’ -- ज्येष्ठ माह के तीसरे मंगलवार पर कवि सम्मेलन का आयोजनमहमूदाबाद(सीतापुर)। ज्येष्ठ माह के तीसरे मंगलवार पर क्षेत्र में रामकुंड चौराहे पर स्थापित ऐतिहासिक हनुमान मंदिर के समक्ष राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। रामकिशोर तिवारी ने पढ़ा ‘देह लाल-लाल बेमिसाल अंजनी के लाल, काल के भी महाकाल रूद्र अवतारी हैं’। फैजाबाद से ख्याति प्राप्त कवि जमुना प्रसाद उपाध्याय ने सुनाया ‘नदी के घाट पर भी यदि सियासी लोग बस जाएं, तो प्यासे होंठा इक-इक बूंद पानी को तरस जाएं’। उन्नाव से पधारे कवि सुरेश कक्कड़ ने कहा ‘संगीन लेके मौत की छाती पे खड़ा है, अपने लहू से देश का इतिहास गढ़ा है, मंदिरों में जाने वाले जरा ध्यान से सुनें, कोई नहीं सरहद के सिपाही से बड़ा है’। फर्रूखाबाद के प्रख्यात कवि डॉ. निराला राही ने सनाया कि अपने घर में अपनेपन का टोटा हो गया, इतनी उठी दीवारें कि आंगन छोटा हो गया। काकोरी के कवि अशोक अग्निहोत्री ने सुनाया कि ‘पीठ ठोक या कहा तात ने मान हमारा रख लेना, भारत मां की खातिर तुम जय हिंद लहू से लिख देना’ सुनाकर पूरे पांडाल में देशभक्ति का संचार कर दिया। कवि सम्मेलन का शुभारंभ छोटे लाल यज्ञसैनी ने किया। कार्यक्रम का संचालन आरके वाजपेयी ने किया। इस अवसर पर सतीश गुप्त, मुरारी लाल पुरवार, षिवदास पुरवार, रमेश मिश्र, राजेन्द्र वर्मा, उमेश वर्मा, अनन्त रत्नम, सीताराम पुरवार, आलोक वाजपेयी, गोपी चंद्र आदि उपस्थित रहे।

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