[solan] - नोटिस तक सिमटी सोलन नगर परिषद, बिल्डर बेलगाम

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सोलन। बहुमंजिला भवनों के निर्माण के मामलों में नगर परिषद सोलन की कार्रवाई महज नोटिस तक सीमित है। बड़ी मछलियों पर हाथ डालने से नप परहेज कर रही है। नप के नोटिसों का जवाब बिल्डर भवन की ऊंचाई बढ़ाकर दे रहे हैं। यह खेल करीब चार सालों से जारी है। नप की परिधि में आसमान छूती इमारतों के निर्माण में रिटेंशन पॉलिसी का अहम योगदान रहा है। वर्ष 2014 से 2016 तक पूरे प्रदेश में जबरदस्त तरीके से चर्चा में रही इस पॉलिसी के लांच होने की वजह से अनधिकृत निर्माण में तेजी आई थी।

शहर में दर्जनों अनधिकृत भवन इस अवधि के दौरान बने हैं। इतना ही नहीं अभी तक ऐसे कई भवनों का निर्माण नप के नाक तले चल रहा है। नप ने दावा किया है कि जो भी अनधिकृत निर्माण हुए हैं उन्हें नोटिस जारी किए हैं। इसकी डिटेल उच्च न्यायालय को भेजी जा रही है। हैरानी की बात यह है कि एक तरफ नप नोटिस जारी कर रही है और दूसरी तरफ बिल्डर माफिया निर्माण में जुटा है। शहर में जिन बड़े लोगों को नप ने नोटिस भेजे हैं उनका निर्माण नहीं रोका गया। नप इस मामले में सीधे तौर पर कार्रवाई कर सकता है। यहां हालात बिल्कुल कसौली की तरह बन रहे हैं। टीसीपी के लगातार नोटिस देते रहने के बावजूद होटल मालिक निर्माण करते रहे हैं। निर्माण हद से बाहर हो गए तो सर्वोच्च न्यायालय को हस्तक्षेप कर पूरे मामले में होटल तोड़ने के आदेश देने पड़े। टीसीपी शुरुआत में नोटिस के साथ ही निर्माण कार्य रोक देता तो शायद कसौली में टीसीपी अधिकारी और लोनिवि बेलदार को अपनी जान से हाथ नहीं धोना पड़ता। बहरहाल, सोलन में नप के अनधिकृत निर्माण की कमान एक बार फिर उच्च न्यायालय के हाथ में जाती नजर आ रही है।

नगर परिषद ने भेजे हैं नोटिस : ईओ

नप के कार्यकारी अधिकारी नरेंद्र चौहान ने कहा कि अनधिकृत निर्माण करने वालों को नप ने नोटिस दिए हैं। इन नोटिस के संबंध में जवाब उच्च न्यायालय को दिया जा रहा है। नप के अधिकार क्षेत्र में सिर्फ नोटिस देने की जिम्मेदारी है जिसे निभाया है। अभी तक किसी भी निर्माण कार्य को नप ने जबरन रोक नहीं लगाई है।

निर्माण रोकना नप का काम : डीसी

डीसी विनोद कुमार ने कहा कि इस बारे में नगर परिषद को कार्रवाई करनी होगी। यदि नगर परिषद कार्रवाई करने में सक्षम नहीं है तो उनके अधिकार टीसीपी को दे देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि नगर परिषद का काम सिर्फ नोटिस भेजने तक सीमित नहीं है बल्कि बहुमंजिला भवन जो नियमों के दायरे में नहीं आते उनका निर्माण रुकवाना भी नगर परिषद का ही काम है।

यह थी रिटेंशन पॉलिसी

पूर्व कांग्रेस सरकार ने सत्ता संभालने के बाद रिटेंशन पॉलिसी पर काम शुरू कर दिया था। पहली बार वर्ष 2014 में इस पॉलिसी को लाया गया। लेकिन पॉलिसी का विरोध होने की वजह से उसमें सुधार किए। इसके बाद वर्ष 2016 में दोबारा से सरकार इस पॉलिसी को लेकर आई। इसमें अनधिकृत निर्माण या कब्जे जिन हालात में थे उन्हीं में मंजूर करने की बात कही। पॉलिसी के तहत आवेदकों को 1100 रुपये की फीस के साथ आवेदन करने थे। इसमें हजारों की संख्या में आवेदन टीसीपी कार्यालय पहुंचे लेकिन उच्च न्यायालय ने इस पॉलिसी पर रोक लगा दी।

नगर परिषद सोलन में यह हैं नियम

नप के अधीन क्षेत्र में तीन मंजिला भवन का निर्माण हो सकता है। सड़क किनारे भवन होने की स्थिति में एक मंजिल पार्किंग के लिए आरक्षित रहेगी। इससे अधिक निर्माण को अनधिकृत श्रेणी में गिना जाता है। यदि ऐसे निर्माण में बिजली और पानी के कनेक्शन दिए हैं तो संबंधित विभागों की जिम्मेदारी भी तय होगी।

भूकंप की दृष्टि से खतरनाक

सोलन शहर भूकंप की दृष्टि से जोन संवेदनशीलता चार की श्रेणी में आता है। कांगड़ा-चंबा समेत हिमाचल के अन्य कई शहर जोन पांच में आते हैं जो सोलन के मुकाबले कहीं ज्यादा संवेदनशील हैं। लेकिन वहां निर्माण की पॉलिसी सोलन से अलग है। धर्मशाला में बहुमंजिला भवन के निर्माण की इजाजत है जबकि सोलन में तीन मंजिला से अधिक निर्माण नहीं किया जा सकता।

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