[tehri] - पुनर्वास की मांग को लेकर फिर कलक्ट्रेट में धमके ग्रामीण

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नई टिहरी। टिहरी बांध प्रभावित नंदगांव, भटकंडा, पिपोला, उठड़, चोपड़ा, रौलाकोट और गडोली के ग्रामीणों ने पुनर्वास की मांग को लेकर कलक्ट्रेट में धरना दिया। उन्होंने कहा कि बांध की झील से हो रहे भूधंसाव के कारण उन्हें खतरों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन सरकार आठ साल में प्रभावितों का पुनर्वास नहीं कर पाई है। टिहरी बांध की झील का जलस्तर बढ़ने से झील के पास बसे गांव के लोग वर्ष 2010 से भूधंसाव की चपेट में हैं। कलक्ट्रेट परिसर में धरने पर बैठे संघर्ष समिति के अध्यक्ष सोहन सिंह राणा ने कहा कि वर्ष 2013 में संपाश्रिवक क्षति नीति बनाई गई थी, जिसके तहत भूधंसाव की चपेट में आ रहे 415 परिवारों के पुनर्वास करने की सिफारिस की गई थी। लेकिन सरकार अभी तक बांध प्रभावितों के लिए जमीन उपलब्ध नहीं करा पा रही है, जिससे ग्रामीण धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ऋषिकेश आईडीपीएल, दुधू पानी में भूमि अधिग्रहण के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार की ओर से लगाई गई आपत्तियों का निस्तारण नहीं कर पा रही है। उन्होंने मांगों का जल्द निस्तारण नहीं किए जाने पर 23 मई से पुनर्वास निदेशालय में बेमियादी धरना शुरू करने की चेतावनी दी। प्रदर्शनकारियों में प्रधान प्रदीप भट्ट, धनपाल सिंह, राम सिंह पंवार, साहब सिंह, नीलम, रामप्यारी, सुनीता, राजी, रमा देवी, रेखा, सरोजनी और सुनीता आदि शामिल थे।

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