[varanasi] - कार्रवाई कर देते तो शायद नहीं होता हादसा

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वाराणसी। फ्लाईओवर के दो बीम गिरने से हुई मौतों की कसूरवार पुलिस भी है। निर्माण कार्य के दौरान राहगीरों की सुरक्षा के प्रति गंभीरता न बरतने, ट्रैफिक वालंटियर्स को तैनात न करने और अराजकतापूर्ण तरीके से कार्य करने के आरोप में 19 फरवरी को सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक के खिलाफ सिगरा थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। मुकदमा दर्ज करने के बाद सिगरा पुलिस ने कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डाल दिया। वहीं, सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक ने मुकदमे को हल्के ढंग से लेते हुए लापरवाह तरीके से निर्माण कार्य जारी रखा।यही नहीं, ट्रैफिक पुलिस ने भी कभी सेतु निगम से नहीं पूछा कि क्यों उपेक्षापूर्ण तरीके से निर्माण करा कर राहगीरों की जान को रोजाना खतरे में डाला जा रहा है। ट्रैफिक पुलिस की ओर से सेतु निगम के खिलाफ कभी कार्रवाई की संस्तुति भी पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों को नहीं की गई।एसएसपी राम कृष्ण भारद्वाज ने इस साल जनवरी से फरवरी के बीच चौकाघाट फ्लाईओवर के निर्माण कार्य का तीन बार निरीक्षण किया था। एसएसपी ने सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक को कहा था कि लहरतारा से अंधरापुल के बीच 30 ट्रैफिक वालंटियर्स तैनात किए जाएं। प्रोटेक्शन वॉल को और अंदर की ओर किया जाए। निर्माण कार्य ऐसे हो कि जाम न लगे और मलबा तत्काल हटा लिया जाया करे। तीन बार की ताकीद के बाद भी जब सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक पर असर नहीं पड़ा तो एसएसपी ने सिगरा थाने में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद सिविल पुलिस और ट्रैफिक पुलिस ने कभी दोबारा झांक कर सेतु निगम के कामकाज के तौर-तरीके का जायजा नहीं लिया।

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