[bareilly] - मौसम में यूं रहा उतार-चढ़ाव तो लेट होगा मानसून

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नोट : अन्य केंद्रों के लिए भी ----फोटो- मौसमफ्लैग- पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विभाग की रिपोर्टमौसम में ऐसा ही रहा उतार-चढ़ाव तो लेट होगा मानसूनअप्रैल-मई में बेमौसम बारिश से कम हो रहे तापमान का पडेगा असर अमर उजाला ब्यूरोबरेली। अप्रैल-मई में आमतौर पर भीषण गर्मी रहती है, लेकिन इस बार नजारा बदला हुआ है। अगर मौसम में यह उतार-चढ़ाव ऐसा ही बना रहा है तो 21 जून से आने वाला मानसून उत्तर प्रदेश में लेट होे सकता है। मानसून की पहली बारिश जून क्रॉस कर जुलाई के पहले या दूसरे सप्ताह में हो सकती है। यह स्थिति मानसून आने से पहले 25 एमएम से ज्यादा बारिश होने से बनी है। ऐसा होने पर किसानों को खरीफ की फसलों की बुवाई में भारी नुकसान होगा। इस बार मौसम विभाग ने मानसून में सामान्य बारिश की भविष्यवाणी की है। आमतौर पर अधिकांश राज्यों में 21 जून तक मानसून आ जाता है। ऐसा तब होता है, जब अप्रैल-मई में न्यूनतम और अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहता है और भीषण गर्मी पड़ती है। मगर, इस बार स्थितियां सामान्य मौसम के विपरीत हैं। अप्रैल-मई में भीषण गर्मी के बजाय पहाड़ों पर बर्फ पड़ी है और मैदानी इलाकों में कई बार बेमौसम बारिश हो चुकी है। मौसम में इस उतार-चढ़ाव का असर मानसून पर पड़ सकता है और इससे अच्छी बारिश की संभावनाएं कम हो सकती हैं। पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. एचएस कुशवाहा के अनुसार अप्रैल-मई में कई बार आंधी और तूफान के साथ बारिश से आसमान में लेयर बन गई है। इस वजह से तापमान आगे नहीं बढ़ पा रहा है। हवा के विपरीत दबाव से बार-बार आंधी-बारिश आ रही है। कई बार आंधी-बारिश आने की वजह स्थानीय है। पश्चिमी विक्षोभ से पहाड़ों पर बर्फबारी होने और मैदानी इलाकों में बेमौसम बारिश मानसून को 25 से 30 दिन आगे ले जा सकती है। डॉ. कुशवाहा का कहना है कि हालांकि मानसून की सही स्थिति जून के पहले हफ्ते में स्पष्ट हो पाएगी, लेकिन अब तक के हालात देखते हुए मानसून लेट होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है।किसानों को होगा भारी नुकसानआईवीआरआई कृषि विज्ञान केंद्र के खेती विशेषज्ञों के अनुसार मानसून लेट होने पर किसानों को खरीफ की बुवाई में भारी नुकसान होगा। जून के आखिरी हफ्ते से किसान धान की रोपाई शुरू कर देते हैं। इसके लिए खेत में अधिक पानी की जरूरत होती है, जो अमूमन बारिश से ही पूरा हो पाता है। बारिश न होने पर किसानों को निजी संसाधनों से पानी भरकर धान की रोपाई करनी पड़ती है। किसानों को महंगा डीजल खरीदकर पानी लगाना पड़ेगा, इससे धान की लागत बढ़ जाएगी। फिलहाल अब एक हफ्ते न आंधी और न बारिशडॉ. कुशवाहा के अनुसार अगले एक सप्ताह तक अब न तो आंधी आने की संभावना है और न ही बारिश की कोई उम्मीद है। आसमान अब पूरी तरह साफ रहेगा। बुधवार को दिन का तापमान 37.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से एक डिग्री कम था। न्यूनतम तापमान 24.7 डिग्री सेल्सियस था। यह भी सामान्य से एक डिग्री कम था। डॉ. कुशवाहा के मुताबिक, पहाड़ों पर कुछ क्षेत्रों में बारिश की संभावना बनी हुई है, लेकिन मैदानी इलाकों में आसमान साफ रहेगा।

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