[basti] - पेयजल के 32 करोड़ की योजना अब भी खटाई में

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बस्ती।

जेई-एईएस से बचाव के लिए सरकार पूरी ताकत लगाए हुए है। इसके लिए जहां गांव-गांव टीकाकरण कराए गए, वहीं, शुद्ध पानी पहुंचाने के भी निर्देश हैं। इसके लिए जिले के 23 गांवों में अनुमानित 32 करोड़ की लागत से ओवरहेड टैंक और करीब तीन सौ किलोमीटर पाइप लाइन बिछाने के प्रस्ताव पर शासन ने स्वीकृति दे दी है। इस स्वीकृति के सापेक्ष कार्य भी शुरू हो गया, मगर शायद इस वर्ष इन ओवरहेड टैंकों से पाइप लाइन में पानी भेज पाना संभव नहीं होगा। क्योंकि जेई-एईएस के लिए संवेदनशील माह शुरू होने के बाद भी 15 स्थानों पर कार्य चल रहा है, जबकि आठ में विद्युत संयोजन हो सका है मगर पानी की आपूर्ति अब तक नहीं हो सकी है।

बनकटी प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र के महथा, जय विजय, उमरी अहरा, रामपुर रेवटी गांव 2016 -017 से ही जेई-एईएस प्रभावित हैं। लेकिन आज तक केवल रामपुर रेवटी में ही ओवरहेड टैंक का निर्माण कराया जा रहा है। अन्य के लिए हैंडपंप ही पानी के स्रोत हैं। ऐसे में ग्रामीण दूषित जल पीने के लिए मजबूर हैं। ग्राम जयविजय के प्रधान अब्दुल समद ने बताया कि गांव की आबादी दो हजार है। गांव में मात्र इंडिया मार्का पंप स्थापित है। इसी का प्रयोग ग्रामीण कर रहे हैं। अब यह पंप शुद्ध पानी दे रहा है या नहीं यह तो जांच का विषय है। फिलहाल, अभी ओवरहेड टैंक से शुद्ध पानी की आपूर्ति सपना बनी हुई है।

टिनिच प्रतिनिधि के अनुसार ब्लॉक की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत अजगैवाजंगल में वर्ष 2011.12 में शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के लिए राजस्व गांव भदना में पानी की टंकी स्थापित कराई गई थी। इस टंकी से यहां के 54 पुरवों के छह हजार की आबादी को शुद्ध पानी देना था। मगर सरकार की मंशा पूरी नहीं हो सकी। क्योंकि जैसे ही पाइप लाइनों में आपूर्ति दी गई वैसे ही कई जगह पाइप क्रेक कर गई। अब सप्ताह में एकाध दिन ही आपूर्ति सुनिश्चित हो पाती है। ऐसे में लोग मजबूर होकर निजी नलों का उपयोग पीने के पानी के लिए कर रहे हैं। गांव के इसरार का कहना है कि पानी की सप्लाई कभी-कभार ही होती है। कभी यह ठीक रहता है तो कभी अंडरग्राउंड पाइप टूट जाता है। इससेे पानी रास्ते में ही बह जाता है। पूर्व बीडीसी सदस्य विजय कुमार का कहना है ऑपरेटर समय से मोटर संचालन नहीं करता, जिससे आपूर्ति बाधित हो जाती है। जल निगम के अभय प्रकाश मिश्र का कहना है की मोटर की खराबी की वजह से पानी की सप्लाई में परेशानी आ रही थी लेकिन अब उसे ठीक करा दिया गया है।

भानपुर प्रतिनिधि के अनुसार तहसील क्षेत्र के रामनगर ब्लॉक में जेई से प्रभावित गांव के लोगों को स्वच्छ पेयजल मुहैया नहीं हो पा रहा है। शुद्ध पानी के लिए नरखोरिया, भीवापार व सेखापुर, चकदोस्त मोहम्मद गांव के बाहर स्थापित ओवरहेड टैंक की सप्लाई व्यवस्था अभी तक मुकम्मल न होने से ग्रामीणों को उसका समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। पाइप लाइन बिछने के बाद भी घरों में लगी टोटियों में पानी नहीं पहुंच रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पाइप लाइन बिछाने में की गई गड़बड़ी से जगह-जगह लीकेज की समस्या बनी हुई हैं। इससे घरों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा हैं। नरखोरिया में पानी की आपूर्ति के लिए पाइप लाइन घरों तक तो बिछा दी गई हैं, लेकिन कुछ जगहों पर अभी तक टोटी नहीं लगाई गई है। जहां लगी हैं उनके घरों में भी पानी नहीं आ रहा है। यही दशा ग्राम पंचायत भीवापार और सेखापुर चकदोस्त मोहम्मद की भी है। ग्राम प्रधानों का कहना हैं कि ग्रामीणों ने अंशदान समय से जमा कर दिया हैं। लेकिन उन्हें समय से लाभ नहीं मिल पा रहा है। कहा कि गांव के सभी घरों तक अभी पाइप लाइन पहुंच ही नहीं सकी है तो पानी कहां से आएगा।

सल्टौआ प्रतिनिधि के अनुसार ग्राम पंचायत गोरखर में ग्रामीणों को स्वच्छ जल उपलब्ध कराने के लिए जल निगम विभाग की ओर से लाखों रुपये खर्च कर ओवरहैड टैंक बना दिया गया, लेकिन विभागीय उपेक्षा के चलते अभी तक इस टैंक से पानी उपलब्ध नहीं हो रहा है। गोरखर ग्राम पंचायत में शुद्ध जल मुहैया कराने के उद्देश्य से वर्ष 2016 में निर्माण शुरू कराया गया और निर्माण भी पूरा हो गया लेकिन अभी पाइप लाइन अधूरी है। इसे छोड़कर ठेकेदार गायब हो गया है। यही हाल इंसेफेलाइटिस से प्रभावित गांव सिसवारी का है यहां भी पानी की टंकी बनकर तैयार है, मगर पानी पीने को नहीं मिल रहा है। इंसेफेलाइटिस से प्रभावित गांव पचमोहनी, बनरही जंगल, औड़जंगल, शिवपुर में अभी तक पानी की टंकी नहीं बन पाई है। इन गांव के लोगों को दूषित जल पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। ग्राम पंचायत बनरही जंगल के ग्राम प्रधान रंगीलाल राजभर ने बताया कि टंकी बनकर तैयार है लेकिन पानी नसीब नहीं हो रहा है।

कुदरहा क्षेत्र के कई गांव इंसेफेलाइटिस प्रभावित

गायघाट। कुदरहा विकास खंड क्षेत्र के करीब दो दर्जन जेई से प्रभावित गांवों में शुद्ध पेयजल के लिए जल निगम की ओर से बना ओवरहेड टैंक शुद्ध पानी देने में अक्षम है। ऐसे में ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की सरकार की मंशा यहां धराशायी है। ब्लॉक के धनौवा, राजपुर बैरिहवा, विसेनपुर, गायघाट , महुआपार, परेवा, परसाव, भिटिया सहित 22 गांवों को स्वास्थ्य विभाग ने जेई-एईएस से प्रभावित होने के कारण चिह्नित किया था। इन गांवों में शुद्ध पेय जल उपलब्ध कराने के निर्देश हुए। जल निगम ने इन गांवों में वर्ष 2015 मे 86950 रुपये की लागत से ओवरहेड टैंक बनवाया, लेकिन धन खर्च होने के बाद भी शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की मंशा पूरी नहीं हो सकी है।

इनकी सुनिए

परसांव निवासी रोशन पाल ने बताया कि गांव में यह टैंक बना था तो उम्मीद जगी कि अब गांव में ही शुद्ध पानी मिलेगा, लेकिन टंकी के ऊपर ढक्कन न लग पाने के कारण टंकी में पत्ते गिरते रहते हैं। इसलिए लोग पानी पीने से कतराते हैं। दो माह से टोटी टूट जाने से बंद पड़ा है।

पाऊं के प्रधान अभिषेक पांडेय ने बताया कि धनौवा में टैंक बने तीन वर्ष हो गया लेकिन पिछली गर्मी में एक माह चला था उसके बाद मोटर जल गया तब से आज तक बंद पड़ा है। कई बार संबंधित जिम्मेदारों से इसकी शिकायत की गई लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हो सकी।

राजपुर बैरिहवा निवासी अनुराग शुक्ला सोनू ने बताया कि मेरे गांव में भी टंकी बनी है और टंकी के चारों तरफ टाइल्स भी लग गई। लेकिन महज मोटर में बिजली की सप्लाई न मिलने के कारण बंद पड़ा है। विभाग की लापरवाही से हम लोगों को शुद्ध पेयजल नहीं मिल पा रहा है।

अरुण द्विवेदी ने कहा कि गायघाट में झारखंडेश्वर नाथ मंदिर में टैंक बना है और चल भी रहा है लेकिन टोटी न लगने के कारण काफी पानी बर्बाद हो रहा है। इससे शासन की मंशा पर पानी फिर रहा है। जिम्मेदारों के लापरवाही वाले से रवैये से गांववालों को पानी नहीं मिल रहा है।

महुआपार के प्रधान इरशाद अहमद ने बताया कि गांव में ओवरहेड टैंक बना तो था लेकिन जल निगम ने आज तक ग्राम पंचायत को हस्तांतरित नहीं किया, जिससे इसका संचालन नहीं हो पा रहा है। अब गांववाले इस बात को लेकर चिंतित हैं कि कब इस टैंक से पानी मिलेगा।

एक्सईएन ने कहा

जल निगम के अधिशासी अभियंता वीपी सोनकर कहते हैं कि शासन ने जिले के 23 स्थानों पर पानी के लिए ओवरहेड टैंक और करीब 300 किलोमीटर पाइप लाइन बिछाने के निर्देश दिए थे। इसके सापेक्ष अब तक आठ स्थानों पर ओवरहेड को विद्युत कनेक्शन से जोड़ा जा चुका है। जबकि नौ पूर्ण हैं, मगर उसके संचालन के लिए बिजली कनेक्शन की जरूरत है, जिसे पूरा कराया जा रहा है। जून माह में चार तथा जुलाई में शेष दो का भी निर्माण पूरा कर दिया जाएगा। सभी ओवरहेड टैंक और पाइप लाइन का कार्य पूरा कर लोगों को पानी उपलब्ध कराया जाएगा।

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डेंगू पर गोष्ठी में बच्चों को दिए टिप्स

राष्ट्रीय डेंगू दिवस : जीजीआईसी में किया गया आयोजन

जागरूकता के लिए बच्चों ने स्वास्थ्य विभाग ने मांगा सहयोग

अमर उजाला ब्यूरो

बस्ती।

राष्ट्रीय डेंगू दिवस पर बुधवार को राजकीय कन्या इंटर कॉलेज सभागार में गोष्ठी आयोजित की गई। स्वास्थ्य विभाग की अगुवाई में आयोजित कार्यक्रम में बच्चों को डेंगू के कारण और इससे बचाव के टिप्स स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने दिए। बच्चों से कहा कि वे अपने घर के अन्य लोगों के अलावा आसपास तथा अपने सभी मिलने-जुलने वालों को भी डेंगू से बचाव का मंत्र दें, जिससे इस रोग पर नियंत्रण पाया जा सके।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सीएमओ डॉ. जेएलएम कुशवाहा ने कहा कि डेंगू का कारक टाइगर मच्छर होता है। जो दिन में सक्रिय रहता है। एक बार में यह कई लोगों को काटने की क्षमता रखता है। इसके लक्षण की चर्चा करते हुए सीएमओ ने कहा कि तेज बुखार, बदन दर्द, सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द के अलावा शरीर पर चकत्ते या लाल दाने इसकी प्राथमिक पहचान है। इस रोग में प्लेट्लेटस कम हो जाते हैं। इसके चलते रोगी की जान भी जा सकती है। कहा कि कोई भी बुखार सामान्य नहीं होता। ऐसे में बुखार होने की दशा में तत्काल डॉक्टरी सलाह लें। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. आईए अंसारी व जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. फख्रेयार ने डेंगू से बचाव के टिप्स दिए। कहा कि घरों में एकत्रित पानी को हर सप्ताह बदल दें, कूलर के पानी को बदलने के बाद उसकी टंकी को रगड़ कर साफ करें, जिससे उसमें चिपके मच्छरों के अंडे व लार्वा मर जाएं। संभव हो तो टंकी को चार पांच दिनों तक धूप में भी सुखाएं। घर के आसपास गंदगी न पनपने दें, शरीर को ढक कर रखें, जिससे मच्छर काटने से बचा जा सके। कार्यक्रम में प्रधानाचार्य जीजीआईसी नीलम सिंह, डॉ. राजकुमार, वीएन मिश्रा, एके मिश्रा, मांडवी सिंह सहित तमाम शिक्षक और बच्चे मौजूद रहे।

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