[budaun] - गर्मी सीजन शुरू, जिला अस्पताल में इंतजाम नहीं

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लीड-----फोटो--1, 2, 3, 4, 5 जिला अस्पताल में डायरिया से निपटने के इंतजाम नहींडायरिया वार्ड में हर मर्ज के मरीजों की भर्ती, नहीं चेते तो होगी दिक्कतअलग से नहीं लगाए गए डॉक्टर, नहीं हो रही मरीजों की देखभाल अमर उजाला ब्यूरो बदायूं। गर्मी लगातार अपने पंजे फैला रही है, यही वजह है कि जिले में डायरिया ने दस्तक देदी है। इसके विपरीत जिला अस्पताल में डायरिया से निपटने के कोई इंतजाम नहीं हैं। डॉक्टर वार्ड में मरीजों को भर्ती करने के बाद देखने तक नहीं पहुंचते हैं। अगर यही हाल रहा तो गर्मी बढ़ने पर जिला अस्पताल प्रशासन को इसके गंभीर परिणाम देखने को मिलेंगे। जिला अस्पताल का दूसरा नाम लापरवाह अस्पताल हो गया है। क्योंकि किसी विपदा से निपटने के लिए यहां पहले से कोई इंतजाम नहीं होते। जब कोई घटना हो जाती है, उसके बाद ही जिला अस्पताल प्रशासन की आंख खुलती है। ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं, जिनके बाद जिला अस्पताल प्रशासन की आंख खुली है । चाहे पत्नी के शव को कंधे पर ढोने वाला मामला हो या फिर सीएमएस द्वारा गंभीर मरीज को देखने से मना करने का मामला, हर मामले में जिला अस्पताल प्रशासन की लापरवाही उजागर हुई है। ऐसे ही बगैर इंतजाम के डायरिया के मरीजों का इंतजार कर रहे जिला अस्पताल को एक बार फिर से मुंह की खानी पड़ सकती है। गर्मी का सीजन शुरू होते ही जिला अस्पताल में डायरिया के मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में जिला अस्पताल प्रशासन डायरिया वार्ड का इंतजाम करता है। डॉक्टरों और कर्मचारियों को अलग से लगाता है। दवाइयां भी पूरी रहती हैं, परंतु इस बार ऐसे कोई इंतजाम नहीं हैं। पिछले वर्ष जिला अस्पताल के पेइंग वार्ड में एक कमरे को डायरिया वार्ड बनाया गया था। वह पूरी तरह से मिट चुका है। इस वार्ड में सर्दी, जुकाम, बुखार और अन्य बीमारियों से जूझ रहे मरीज भर्ती हैं। इस वार्ड में डायरिया से पीड़ित सिर्फ तीन मरीज ही भर्ती हैं। वह भी अस्पताल की सुविधाओं से वंचित हैं। ----डायरिया वार्ड में 16 मरीज रह चुके हैं भर्ती डायरिया वार्ड में एक मई से अब तक 16 मरीजों का इलाज किया जा चुका है। बाकी अन्य वार्डों में भी डायरिया से पीड़ित मरीज भर्ती रहे हैं और इस समय भी भर्ती हैं। ---वार्ड में फैली है गंदगी जिला अस्पताल प्रशासन ने जिस वार्ड को डायरिया वार्ड माना है। उसमें काफी गंदगी है। किसी बेड पर चादर नहीं है तो किसी का गद्दा फटा हुआ है। पंखे भी ठीक से नहीं चल रहे हैं। फर्श गंदा है। शौचालय की हालत बहुत ही खराब है। --क्या कहते हैं तीमारदार फोटो-6 डॉक्टर साहब ने अब तक उनकी नातिन को एक ही बार देखा है। बच्ची के माथे पर पसीना आ रहा है। कई बार नर्स को बोल आए हैं। बच्ची की हालत में सुधार नहीं हो रहा है। इसलिए इसे कहीं दूसरे अस्पताल में ले जाएंगे। -विद्यावती, तीमारदार --फोटो-7 हमारे नाती को डायरिया हुआ है। उसे बुधवार सुबह यहां भर्ती कराया था। बच्चे की हालत में तो सुधार है लेकिन यहां के हालात बहुत खराब हैं। मरीज भर्ती करने के बाद डॉक्टर उसे देखने नहीं आते। व्यवस्था खराब है। -रामऔतार, तीमारदार --फोटो-8 मेरे बेटे को बहुत तेज बुखार है। उसकी पूरा शरीर जल रहा है। ठंडे पानी की पट्टी बनाकर रख रहे हैं। कई बार डॉक्टर और स्टाफ से बोल चुके हैं कि वह उनके बेटे को देख लें। परंतु सुबह से लेकर दोपहर हो गई। अब तक कोई नहीं आया है। -कैलाश, तीमारदार --हमारे यहां डायरिया वार्ड बना है। मरीज आने पर भर्ती हो रहे है। रही बात डायरिया वार्ड में अन्य मरीजों के भर्ती होने की तो इस पर विचार किया जाएगा। अगर किसी को समस्या है तो वह शिकायत करे। उस पर कार्रवाई होगी। - डॉ. आरएस यादव, सीएमएस जिला अस्पताल

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