[champawat] - ग्रामीण क्षेत्रों की चार बस सेवाअाें का संचालन बंद हुआ

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रोडवेज द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के संचालित बस सेवाएं बंद करने के कारण यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के चार रूटों में कम आय मिलने के कारण परिवहन निगम द्वारा इन बस सेवाओं का संचालन बंद कर दिया।

रौंसाल-बरेली, बर्दाखान-बरेली, लोहाघाट-पंचेश्वर, लोहाघाट-रीठा साहिब के लिए बसों का संचालन ठप है। ग्रामीण क्षेत्रों में बसों का संचालन ठप पड़ने से टैक्सी चालकों ने यात्रियों से मनमाना किराया वसूला जा रहा है। साथ ही वाहनों में मनमाने तरीके से यात्रियों को भरा जा रहा है। रोडवेज बसों का संचालन नहीं होने से यात्रियों को ज्यादा किराया देकर मजबूर जीप -टैक्सियों में बैठने को मजबूर होना पड़ रहा है। उक्त मार्गों में रोडवेज बसों का संचालन होने से यात्रियों को काफी सुविधाएं मिलती थी। करीब चार दशक पूर्व बने लोहाघाट डिपो का कार्य संचालन टिनशेड में संचालित हो आ रहा है।

रोडवेज के इस डिपो में छह माह से सहायक मंडलीय प्रबंधक (एजीएम) का पद छह माह रिक्त चला आ रहा है। इसके चलते यहां 90 किमी दूर टनकपुर के एजीएम को यहां का कार्यभार सौंपा गया है। कार्यशाला में भी सीनियर फोरमैन को छोड़ अन्य तकनीकी स्टाफ की भारी कमी के कारण बसों के रखरखाव में दिक्कतें हो रही हैं।

10 रूटों पर चल रही है 17 बसें

लोहाघाट रोडवेज डिपो में 42 बसें हैं। डिपो से प्रतिदिन 10 रूटों के लिए 17 बसों का संचालन होता है। इसमें दिल्ली के लिए पांच, देहरादून तीन, बरेली दो, टनकपुर से हरिद्वार के लिए दो और काशीपुर, हल्द्वानी, नैनीताल, ऋषिकेश व पोंटा साहिब के लिए एक-एक बस का संचालन होता है।

कोट

लोहाघाट डिपो से कई ग्रामीण क्षेत्रों के लिए रोडवेज बसों का संचालन पहले भी किया गया था। इन रूटों में डिपो को 50 फीसदी से कम आय मिलने के चलते बसों का संचालन बंद करना पड़ा। जिस रूट पर वाहनों का संचालन होता है, वहां न्यूनतम 65 फीसदी आय होनी चाहिए।

भुवन चंद्र आर्या, वरिष्ठ केंद्र प्रभारी, लोहाघाट डिपो।

नहीं मिलता सरकारी रियायतों का लाभ

रीठा साहिब गुरुद्वारे में सालभर देश-विदेश से श्रद्धालु आते-जाते रहते हैं। लोहाघाट से बस सेवा नहीं होने से यहां पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। एससीएसटी महासंघ और खुशीराम शिल्पकार सुधारिणी सभा के जिलाध्यक्ष पनीराम आर्य, सामाजिक कार्यकर्ता भवान सिंह परवाल, सरदार सिंह बोहरा, नंदन राम, वीरेंद्र कुमार, पुष्कर बगोटी, भूपाल बगोटी, मोहन सिंह आदि का कहना है कि टैक्सी चालक वाहनों में क्षमता से अधिक सवारियां भरते हैं। बस सेवा बंद होने से छात्राओं को रोडवेज द्वारा जारी किए जाने वाले पास का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। वरिष्ठ नागरिकों को निशुल्क सेवा का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

चंपावत व नैनीताल जिले के ग्रामीण क्षेत्र प्रभावित

रोडवेज बस का नियमित संचालन न होने से चंपावत जिले की सीमा से लगे नैनीताल जिले के पदमपुरा, बसानीधुरा, अमजड़, मीडार, सुकोट, पोखरी, कैडागांव, धैंना, कजलीकोट के अलावा चंपावत जिले के रीठा साहिब, साल, टांण, मछियाड़, कुल्यालगांव, चम्योली, चौड़ामेहता, चौड़ापिता, बिनवालगांव, धरसों, गोलडांडा, नौलियागांव, रमक, मंगललेख, कुकना, चल्थियां, भिंगराड़ा के लोग सबसे ज्यादा परेशान हैं। लोगों का कहना है कि इस रूट पर लगातार बस सेवा का संचालन किया जाय तो लोगों को काफी राहत मिलेगी। इससे डिपो की भी आय बढ़ेगी।

छह रूटों पर बंद है रोडवेज बसों का संचालन

टनकपुर (चंपावत)। पीक सीजन में परिवहन निगम की आय पर बसों की कमी भारी पड़ रही है। सीजन में यात्रियों की भरमार है, लेकिन टनकपुर से मुनाफे वाले छह रूटों पर बसों का संचालन बंद पड़ा है। निगम प्रबंधक की मानें तो डिपो में दस और बसों के साथ ही स्टाफ की भी जरूरत है। एआरएम (संचालन) केएस राणा नेे बताया कि टनकपुर से मथुरा, सुनौली, गोरखपुर, कोटद्वार, रूपेड़िया रूट में पिछले पांच सालों से बसों का संचालन बंद पड़ा है। पर्वतीय क्षेत्र में नाचनी रूट पर भी बस का संचालन पिछले तीन सालों से बंद है। उनके अनुसार ऐसा डिपो में बसों की कमी के कारण है। उन्होंने बताया कि टनकपुर डिपो में 117 बसें हैं, जिनमें से चार बसों को छोड़कर सभी बसें इन दिनों ऑन रोड हैं। एआरएम संचालन का कहना है कि जिन मार्गों पर बसों का संचालन बंद है। वे मार्ग भले ही सालभर मुनाफे वाले नहीं है, लेकिन सीजन में इन मार्गों में भी अच्छा खासा मुनाफा होता था। उनके मुताबिक बंद पड़े मार्गों पर भी बसों का संचालन शुरू करने के लिए डिपो में आठ से दस बसों के साथ ही स्टाफ की भी जरूरत है।

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