[ghazipur] - अंतिम सफर में भी साथ गए दोनों मित्र

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नंदगंज(गाजीपुर)। हर समय एक-दूसरे की खुशी और गम में साथ रहने वाले वीरेंद्र और संजय अंतिम सफर में भी एक साथ गए। सहेड़ी गांव से पिता और दो पुत्रों की एक साथ तीन अर्थी निकलते देख सभी का कलेजा कांप उठा। मृतकों की अर्थी एक साथ गंगा के किनारे दाह संस्कार के लिए पहुंची तो लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। गंगा के किनारे एक साथ जल रही चारों चिताओं ने लोगों को झकझोर कर रख दिया।मंगलवार की शाम वाराणसी में हुए हादसे के बाद मुड़वल और सहेड़ी गांव में लोगों का आना-जाना शुरू हो गया था। करीब साढ़े 12 बजे खुशिहाल राम, शिवबचन राम, संजय राम और वीरेंद्र यादव का शव घर पहुंचते ही ग्रामीणों की भीड़ मृतकों के दरवाजे पर टूट पड़ी। सहड़े चट्टी पर स्थित दुकानदार अपनी दुकानें बंद कर दरवाजे की तरफ दौड़ पड़े। हर कोई मृतकों के परिजनों की इस पीड़ा को देख काफी मर्माहत दिखाई पड़ रहा था। शवों के आते ही मानो एक ही क्षण में सन्नाटा पसर गया। इस सन्नाटे को परिजनों के रोने-बिलखने की ही आवज चीरती दिख रही थी। जब ग्रामीणों ने पिता और दो पुत्रों की अर्थी एक साथ उठाई तो वहां खड़े हर किसी का कलेजा इस दृश्य को देख कांप उठा। इसके बाद जैसे ही सहेड़ी से पिता और दो पुत्रों की अर्थी ग्रामीण गाजीपुर श्मशान घाट के लिए लेकर रवाना हुए। ठीक दो किलोमीटर की दूरी पर संजय के मित्र वीरेंद्र की अर्थी अपने मित्र के साथ अंतिम सफर जाने का तैयार थी। ईश्वर के इस खेल को देख हर किसी की आंखें नम हो उठीं। गाजीपुर श्मशान घाट पर एक साथ जल रही चारों चिताओं ने वातावरण और भी गमगीन बना दिया।

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