[jalaun] - दो परिवारों के लिए काली साबित हुई मंगलवार की रात

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मुहम्मदाबाद। दो परिवारों के लिए मंगलवार की रात काली साबित हुई। एक परिवार डकोर के बलदेव का था तो दूसरा उसके दामाद रामकरन का। रामकरन के पिता गयाप्रसाद को जब हादसे की खबर लगी तो वह भी परिवार के साथ बदहवास हालत में वहां से निकल पड़े। जिसने भी इस हादसे के बारे में सुना सन्न रह गया।

कोई नहीं जानता था कि एक हादसे में ही पूरा परिवार तबाह हो जाएगा। रात को जब यह परिवार खुशी खुशी निकल रहा था तो परिवार के सदस्य ही नहीं बल्कि गांव के लोग भी उन्हें भेजने इकट्ठा हुए थे। हादसे की खबर पहुंचते ही कोहराम मच गया। बलदेव पर तो जैसे दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। हादसे में उनकी पत्नी, बेटा, बहू, नातिन, बेटी व दामाद के शव एक साथ घर पहुंचे तो मंजर को देखकर सभी की आंखों में आंसू आ गए। सभी परिवार को ढांढस बंधाने की कोशिश तो कर रहे थे लेकिन अपने आंसू नहीं रोक पा रहे थे। बलदेव टकटकी लगाए घर के आंगन में रखे शवों को देख रहे थे। लोग अंदर कमरे में ले गए तो वह रो रो कर वहीं बेहोश हो गए। वह एक ही बात दोहरा रहे थे कि आखिर क्यों सभी को जाने की इजाजत दे दी।

-हादसे ने छीन लीं शादी की खुशियां

तीन दिन पहले 12 मई को बलदेव के भतीजे दीपक की शादी थी। एक पल में ही इस भयावह हादसे ने शादी की खुशियां छीन ली। दीपक की पत्नी का भी रो रो कर बुरा हाल हो गया।

-जीते जी नहीं मर के पाएंगे गंगा

परिवार जीते जी तो मां गंगा के चरणों में शरण तो न पा सके, लेकिन मर कर वह गंगा के चरणों में जाएंगे। पोस्टमार्टम हाउस के बाहर परिवार के लोग बात कर रहे थे कि इस दर्दनांक हादसे में मरने वालों की आखिरी इच्छा पूरी की जाएगी। उनकी अस्थियों को गंगा नदी में विसर्जित किया जाएगा। पोस्टमार्टम के बाद शवों को घर जाया गया और शाम को ही उनके अंतिम संस्कार की तैयारी की गई। यह परिवार खुशी खुशी गंगा में स्नान करने के लिए घर से निकला था, लेकिन अब उनकी अस्थियां गंगा में विसर्जित की जाएगी। यह सोच कर सभी की रूह कांप गई।

  • हादसे का मंजर बताते हुए बेहोश हुए शैलेंद्र

इस भयावह हादसे में एक मात्र जिंदा बचा परिवार का सदस्य बलदेव का छोटा बेटा शैलेंद्र जब गांव पहुंचा तो सभी को रो रो कर हादसे के बारे में बताने लगा। हादसे का मंजर बताते हुए वह बेहोश होकर घर के दरवाजे पर गिर पड़ा। किसी तरह उसे होश में लाया गया तो वह फिर रोने लगा। हादसे में घायल हुई उसकी पत्नी रूबी और बेटा आशीष भी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।

घटना स्थल पर मिलीं चप्पलें

परिवार के लोग जब घटना स्थल पर पहुंचे तो वहां का मंजर देखकर उनके होश उड़ गए। वहां पर ट्रक पहिये के नीचे आए परिवार के सदस्यों के मांस के लोथड़े और उनकी चप्पलें पड़ी हुई थी। उन चप्पलों को उठाते वक्त कई तो रो रो कर वहीं गिर पड़े। इस दर्दनांक हादसे ने उस परिवार के लोगों को पूरी जिंदगी को उजाड़ कर रख दिया।

  • उठ जा न बिटिया, काहे लेटी है

जिसकी किलकारी से पूरा घर चहकता रहता था बलदेव की उस नातिन कविता का शव घर के आंगन में पहुंचा तो बलदेव उसकी पुरानी यादों को याद कर रोने लगा। वह सभी को बता रहा था कि कविता यहां बैठ कर खाना खाती तो कहां बैठकर पढ़ती थी। यहां तक कि उसने कविता को खिलौनो को भी उसके पास लाकर रख दिया था। बलदेव ने बताया कि कविता का जन्म हुआ तो मानों उसके घर में स्वयं माता लक्ष्मी का वास हो गया हो। वह कविता के शव के पास बैठकर बार बार उसे यह कहकर उसे उठाने की कोशिश कर रहा था कि उठ जा न बिटिया काहे लेटी हौ, चल गांव में घूम कर आते है।

यहां पढें पूरी खबर— - http://v.duta.us/2b4hOgAA

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