[lucknow] - कुतों के भौंकने की आवाज भर से सहम जाते हैं परिवार

  |   Lucknownews

कुत्तों के भौंकने की आवाज भर से सहम जाते हैं परिवारसीतापुर। आंखें नम हैं, चेहरे पर उदासी और माथे पर चिंता की लकीरें साफ झलक रही हैं। कुछ ऐसा ही हाल उन परिवारों का है, जिनके बच्चों को आदमखोर कुत्ते अपना निवाला बना चुके हैं। गांव में ज्यों ही कुत्ते भौंकते हैं, ये परिवार सहम जाते हैं। हालांकि जिम्मेदारों ने बच्चों की मौत के बाद आर्थिक मदद की चेक सौंपकर पल्ला झाड़ लिया है। मगर ये परिवार संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। इनका कहना है कि मासूमों पर अत्याचार की इंतिहा हो चुकी है, अब ऐसा कारगर उपाय होना चाहिए, जिससे आदमखोर कुत्तों की दहशत से निजात मिल सके।बता दें कि खैराबाद इलाके में आदमखोर कुत्तों ने इस कदर आतंक मचाया है, कि 13 बच्चे जान गंवा चुके हैं, जबकि 27 बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घायलों में कई ऐसे बच्चे हैं, जो जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। आदमखोरों का आतंक इस कदर है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक को सीतापुर का दौरा करना पड़ा। इसके बावजूद आदमखोर कुत्तों पर लगाम कसती नजर नहीं आ रही है। ‘अमर उजाला टीम’ ने पीड़ितों के घर जाकर उनका हाल जानने का प्रयास किया। खैराबाद के गुरपलिया निवासी आबिद के पुत्र खालिद को एक मई को आदमखोर कुत्तों ने अपना निवाला बनाया था। बुधवार को दिन में भी उसके घर के दरवाजे बंद थे, गांव में सन्नाटा पसरा था। कुंडी खटखटाई तो आबिद ने दरवाजा खोला। उसके बच्चे रुखसाना, माजिद, आदिल, आकिब व आयान घर में ही कैद से मिले। हाल पूछते ही आबिद व उसकी पत्नी महजबी की आंखों से आंसू छलक पड़े। पति व पत्नी ने कहा कि, एक बार गांव का हाल देख लो साहब, हर तरफ दहशत अब भी कायम है। न जाने, कब और कहां आदमखोर कुत्ते हमला कर दें, इस बात का कोई भरोसा नहीं। दोनों ने कहा कि काम ऐसा हो कि सरकार को आर्थिक मदद के नाम पर मुआवजा देने की नौबत ही न आने पाए।गुरपलिया निवासी मोबीन के घर भी दहशत का माहौल था। मोबीन की पत्नी जरीना ने अपने बच्चों फैसल, साहिल, सरवरी व सना को घर में ही बंद करके रखा था। पूछने पर मोबीन व जरीना ने बताया कि, जब से उनके पुत्र रहीम को आदमखोर कुत्तों ने निवाला बनाया है, तब से पूरा गांव दहशत में है। दोनों ने कहा कि, आर्थिक मदद देने की जरूरत नहीं है। जरूरत है तो इस आतंक के खात्मे की। आए दिन कोई न कोई बच्चा इन आदमखोर कुत्तों का निवाला बन रहा है। आखिर सरकार कब तक पीड़ितों को मुआवजा देती रहेगी। इसके लिए जिम्मेदारों को ठोस प्लानिंग की आवश्यकता है। वर्ना एक दिन ये घटनाएं बड़ा भयानक रूप ले लेंगी।टिकरिया गांव में भी सन्नाटा पसरा मिला। गांव निवासी कैलाश के घर में मौजूद बच्चे दामिनी, कामिनी व नालिनी घर का दरवाजा बंद कर छत पर बैठे थे। कुंडी खटखटाने पर कैलाश की पत्नी शिवरानी ने दरवाजा खोला और फफककर रोने लगी। शिवरानी बोली, बिटिया सावनी की बहुत याद आती है। सावनी को एक मई को कुत्तों ने निवाला बनाया था। इस परिवार का भी कहना था कि, जिम्मेदारों को जल्द ऐसा इंतजाम करने की जरूरत है कि किसी मासूम की जान न जाने पाए। क्षेत्र में जो दहशत व्याप्त है, उसे हर हाल में खत्म करने की जरूरत है।महेशपुर निवासी छंगा परिवार भी गमजदा था। 13 मई को महेश की पुत्री रीना को आदमखोर कुत्तों ने मार डाला था। छंगा कहने लगा कि, परिवार व बच्चों की परवरिश के लिए वह उत्तराखंड में मजदूरी करने गया था। मगर यहां तो हालत ये है कि जिन बच्चों की परवरिश के लिए घर छोड़ा, वे ही सुरक्षित नहीं हैं। छंगा की पत्नी नीरजा देवी अपने बच्चों बीना, बादल, नेहा, अंजली को पास में बिठाए थी। नीरजा बोली कि, समझ में ही नहीं आ रहा है कि क्या करें, क्या न करें। छंगा ने कहा कि, अब तो बच्चों को छोड़कर जाने की हिम्मत ही नहीं बची है। भूखे रह लेंगे, मगर कमाने के लिए बाहर नहीं जाएंगे।

यहां पढें पूरी खबर— - http://v.duta.us/GeeQigAA

📲 Get Lucknow News on Whatsapp 💬