[mainpuri] - आवारा कुते न बना दें सीतापुर जैसे हालात

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मैनपुरी। जिले में आवारा कुत्तों की कमी नहीं है। आवारा कुत्तों के हमलों से आए दिन लोग शिकार हो रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग स्वास्थ्य केंद्रों पर कुत्ता काटे की वैक्सीन का डोज लेने के लिए पहुंच रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड पर यदि नजर डाली जाए तो इस वर्ष अब तक 1696 लोगों को कुत्तों ने अपना शिकार बनाया है। इनमें से दो मरीजों की मौत हुई है। मरीजों के उपचार के लिए 3592 वॉयल वैक्सीन का प्रयोग किया गया है।

रात के समय तो गांव तथा शहर की गलियों में आवारा कुत्तों से बचना मुश्किल हो गया है। शहर की अपेक्षा गांवों में आवारा कुत्तों की बड़ी संख्या है। रेलवे स्टेशन, कांशीराम कालोनी, मोहल्ला छपट्टी, दरीबा आदि क्षेत्रों में बड़ी संख्या में आवारा कुत्ते घूमते देखे जा रहे हैं। जिला अस्पताल में प्रतिदिन 320 से 350 मरीज कुत्ता काटे के पहुंच रहे हैं। 27 जनवरी को सरदार निवासी ललूपुर की कुत्ता के काटने से मौत हो गई थी।

वहीं मार्च महीने में 14 वर्षीय साधना निवासी सलेमपुर पढ़ीना की कुत्ता के काटे जाने से मौत हो गई थी। इसके बावजूद जिला प्रशासन और शासन ने आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए अभी तक कोई अभियान नहीं चलाया है। इससे आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। सीएमओ कार्यालय में दर्ज रिकार्ड के अनुसार जनवरी 2018 से अब तक नौ सीएचसी और दो पीएचसी पर 2110 वॉयल वैक्सीन से 946 मरीजों को उपचार दिया गया।

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