[roorkee] - जिले के पहले तालाब के सौंदर्यीकरण और खाद बनाने का पायलेट प्रोजेक्ट शुरू

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अमर उजाला ब्यूरोरुड़की। स्वच्छ भारत मिशन के तहत केंद्र सरकार की ठोस एवं तरल संसाधन प्रबंधन (एसएलआरएम) परियोजना के अंतर्गत पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत रुड़की के समीप मोहनपुरा मोहम्मदपुर से की गई है। बुधवार को यहां स्थित तालाब में जलकुंभी कंपोस्टिंग इकाई का शुभारंभ किया गया। इस प्रोजेक्ट से तालाब की सफाई के साथ ही इससे निकलने वाले समुद्र सोख (जलकुंभी) से जैविक खाद भी तैयार की जाएगी। इससे ग्राम पंचायत को सालाना करीब पांच लाख की आमदनी भी होगी। गांव में पांच जून तक तालाब को साफ करने का लक्ष्य रखा गया है। केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत मिशन के तहत अब ठोस एवं तरल संसाधन प्रबंधन पर जोर दिया जा रहा है। इसके तहत विभिन्न गांवों में स्थित तालाबों की साफ- सफाई कर जैविक खाद तैयार करने की योजना है। पायलट प्रोजेक्ट के लिए जिले में मोहनपुरा मोहम्मदपुर के साथ ही लक्सर क्षेत्र के फतवा गांव स्थित तालाब का चयन भी किया गया है। बुधवार को मोहनपुरा मोहम्मदपु गांव से इसकी शुरुआत की गई। इस दौरान आयोजित कार्यक्रम में तमिलनाडु से आए केंद्र सरकार के प्रतिनिधि श्रीनिवासन ने ग्रामीणों एवं स्वयंसेवियों को तालाब से जलकुंभी को निकालने और इसके बाद खाद तैयार करने की जानकारी दी। साथ ही गांव में जैविक एवं अजैविक कूड़े केे अलग-अलग करने तथा इसका निस्तारण करने की भी जानकारी दी। कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी स्वाति भदौरिया ने कहा कि इस प्रोजेक्ट से ग्रामीण क्षेत्रों में तालाबों के सौंदर्यीकरण के साथ-साथ आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। ग्राम प्रधान सतेंद्र प्रकाश ने इस परियोजना के शुभारंभ के लिए अधिकारियों का आभार जताया। इस मौके पर स्वजल हरिद्वार के परियोजना प्रबंधक संजीव राय, स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के निदेशक डा. राघव लंगर, पर्यावरण विशेषज्ञ डा. रमेश एवं पवन मिश्रा आदि मौजूद रहे। दूसरे चरण में घर-घर से एकत्र होगा कूड़ारुड़की। मुख्य विकास अधिकारी स्वाति सिंह भदौरिया ने बताया कि परियोजना के तहत पहले चरण में पांच जून तक तालाब की सफाई का काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही जलकुंभी से खाद बनाने का प्रोसेस भी चलेगा। दूसरे चरण में घर-घर से कूड़ा एकत्र किया जाएगा। इसमें से जैविक और अजैविक कूड़े को अलग किया जाएगा। जैविक कूड़े से खाद बीनाने के साथ अजैविक कूड़े को कंपनी से टाइअप कर उसे बेचा जाएगा। इससे ग्राम समाज की आमदनी भी बढ़ेगी।24 घंटे में कूड़ा निस्तारण करने की है योजना विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी कूड़े से खतरनाक गैसें 24 घंटे बाद उत्सर्जित होने लगती है। इससे स्वास्थ्य को खतरा बन जाता है। परियोजना का मुख्य उद्देश्य कूड़े का 24 घंटे के अंतराल में निस्तारण करना है। इसके लिए स्वयंसेवियों को भी अभियान से जोड़ा जाएगा। यह पायलट प्रोजेक्ट है। इसके बाद अन्य गांवों में यह प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। इसके लिए तालाब में खड़ी जलकुंभी को निकालने के लिए चार मशीनें खरीदी गई हैं। प्रधान सतेंद्र प्रकाश ने बताया कि ग्राम पंचायत ने अपने बजट से करीब 15 हजार में एक मशीन खरीदी है। आठ रुपये किलो बिकेगी खाद ग्राम प्रधान सतेंद्र प्रकाश ने बताया कि तालाब से जलकुंभी को निकालकर एक गड्ढे में डालने के बाद गाय के गोबर और दही इसमें डाली जाएगी। इसके बाद करीब 45 दिन में इसे निकालने के बाद पानी से साफ किया जाएगा। इससे बनने वाली खाद की कीमत करीब सात से आठ रुपये प्रति किलो होगी। उन्होंने बताया कि करीब 200 वर्ग फीट क्षेत्र में बनाई गई खाद की कीमत करीब 45 हजार होगी। इससे सालाना करीब पांच लाख की खाद तैयार की जा सकती है।

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