[solan] - अब नींव खोदने के लिए लेना होगा प्रमाणपत्र

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सोलन। अनधिकृत निर्माण के खिलाफ एक्शन मोड में आई नगर परिषद सोलन ने धरातल पर बिल्डरों को बांधने की तैयारी कर ली है। अब सोलन शहर में सभी नए निर्माणों के लिए नींव खोदते वक्त प्रमाणपत्र लेना पड़ेगा। नगर परिषद के कनिष्ठ अभियंता मौके पर जाकर नींव के आकार की जांच करेंगे और नक्शे के आधार पर प्रमाणपत्र जारी करेंगे। इसके अलावा नियमित रूप से कनिष्ठ अभियंता निर्माण कार्य का जायजा भी लेंगे।

भविष्य में यदि निर्माण अनधिकृत पाया जाता है तो संबंधित कनिष्ठ अभियंता और भवन निर्माता के खिलाफ कार्रवाई होगी। नप सोलन इस प्रस्ताव को अमल में लाने जा रही है। इसी माह हाउस की बैठक होनी है। हालांकि इस बैठक का मूल एजेंडा शूलिनी मेले का रहेगा। लेकिन बैठक के दौरान ही रिटेंशन पॉलिसी और शहर में हो रहे अनधिकृत निर्माण पर चर्चा की जाएगी। इसमें नप शहर में नवनिर्माण पर पूरी तरह से रोक लगाने या फिर नींव डालते समय मानकों के आधार पर प्रमाणपत्र जारी करने के नियमों को सख्ती से लागू करने पर फैसला ले सकती है। शहर में अनधिकृत निर्माण के करीब 163 मामले सामने आए हैं। नप ने इन भवन मालिकों को शुरुआत में नोटिस दिए थे। जांच के बाद जो निर्माण अनधिकृत पाए गए हैं उनकी रिपोर्ट उच्च न्यायालय को भेजी जा चुकी है। इस पर अब फैसला न्यायालय को लेना है।

सख्ती से लागू करेंगे नियम : ठाकुर

नप के अध्यक्ष देवेंद्र ठाकुर ने कहा कि नप दोराहे पर खड़ी है या तो निर्माण की इजाजत दे या बिल्कुल ही रोक लगा दे। निर्माण की इजाजत कनिष्ठ अभियंता के प्रमाणपत्र के आधार पर ही मिल सकती है। यह प्रमाणपत्र भवन का निर्माण शुरू करते वक्त लेना होगा। इसमें तय हो जाएगा कि भवन की दिशा और दशा क्या होगी। नप सख्ती से इस नियम को लागू करेगी। यदि विरोध होता है तो शहर में भविष्य में निर्माण की इजाजत ही नहीं दी जाएगी।

उच्च न्यायालय को भेज रहे रिपोर्ट

अध्यक्ष ने कहा कि नप क्षेत्र में जिन लोगों ने नियम तोड़े हैं उनकी सारी रिपोर्ट उच्च न्यायालय में भेजी है। नप ने अनधिकृत निर्माण से जुड़ी सभी फाइलें और फोटोग्राफ उच्च न्यायालय को सौंपे हैं। मामले पर उच्च न्यायालय से जो भी आदेश आएंगे नप उन्हें पूरा करेगी। बताया कि नप ने निर्माण कर्ताओं को लगातार नोटिस दिए हैं। लेकिन उन्होंने नप के नोटिस को हर बार अनसुना कर दिया।

1995 से पूर्व नहीं चलते थे नियम

शहर में बहुमंजिला भवनों का निर्माण 1995 से पूर्व हुआ। 1995 में करीब 40 फीसदी हिस्से को नप से जोड़ा था उस समय तक नए हिस्से में कई बहुमंजिला भवन बन चुके थे। यही नहीं जिन इलाकों को जोड़ा गया उनमें न तो टीसीपी और न ही नगर परिषद के नियम चलते थे। इसकी वजह से निर्माण होता रहा।

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