[tehri] - जमीन के नीचे के पानी के अंधाधुंध दोहन से बढ़ रहा जल संकट

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नई टिहरी। आनंद वाटिका ग्रीन गुरुकुलम और शिवालिक एकेडमी की पहल पर मंगलवार को रजाखेत में जल दर्शन विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। प्राकृतिक जल स्रोतों पर पानी के घटते स्तर पर वक्ताओं ने चिंता जताई। जलस्तर कम होने का मुख्य कारण वक्ताओं ने पेड़-पौधों का अवैज्ञानिक दोहन और अंधाधुंध सड़कों का निर्माण होना बताया। रजाखेत में जल दर्शन विषय पर आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ यूकोस्ट की प्रोजेक्ट मैनेजर डा. सुमन ने किया। उन्होंने वर्षा जल का संरक्षण और संवर्द्धन की जानकारी दी। कहा कि जल के संसाधन सीमित है, जबकि आबादी लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसी स्थिति में यदि हमने जल संरक्षण और उसके समान वितरण के उपाय नहीं किए, तो भविष्य में पानी का संकट अधिक गहरा सकता है। नेशनल रिर्सोसेज मैनेजमेंट सोसायटी के अंकित भंडारी ने पर्वतीय क्षेत्रों में घटते जलस्रोतों को अभिशाप बताया। आनंद वाटिका ग्रीन गुरुकुलम की प्रधानाचार्य अनीता नौटियाल ने कहा कि आबादी के तेजी से बढ़ते दबाव और जमीन के नीचे के पानी के अंधाधुंध दोहन से जल संकट बढ़ रहा है। जल संरक्षण के उपायों और जमीन में स्थित पानी के दोहन की नीति बना कर इस समस्या पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकता है। इस मौके पर शिवालिक एकेडमी के प्रधानाचार्य गोपाल दत्त पैन्यूली, सुरेश नौटियाल, रमेश रतूड़ी, वीर सिंह, प्रकाश, राजेश्वरी देवी, आकांक्षा, विनीता आदि उपस्थित रहे।

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