[kota] - प्रदेश के 22 सहकारी भूमि विकास बैंक पर आखिर क्यों लटकी तलवार...

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कोटा. सरकारें अपना वोट बैंक पक्का करने के लिए कर्ज माफी की घोषणाएं कर वाहवाही लूट रही है। यही घोषणाएं सहकारी बैंकों के तालाबंदी का कारण बनती नजर आ रही है।

इस तरह की घोषणाओं से नियमित ऋण चुकाने वालों ने भी हाथ खींच लिए हैं। इस कारण सहकारी बैंकों का अर्थचक्र गड़बड़ा गया है। प्रदेश के 22 प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंक घाटे में चल रहे हैं। इन बैंकों को अब दूसरे बैंकों में विलय करने की तैयारी शुरू हो गई है।

प्रदेश के सहकारी बैंकों की वित्तीय स्थिति की पिछले सप्ताह रजिस्ट्रार ने समीक्षा की। इस रिपोर्ट में सामने आया कि ऋण माफी के कारण न तो बैंकों में पुर्नऋण का वितरण का लक्ष्य पूरा हो पाया है और न वसूली का। बैंकों में कार्यशील पंूजी का संकट हो गया है। इस रिपोर्ट में सामने आया कि 22 प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंक सिंचित हानि में हैं।...

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