[kuchaman-city] - पल्स पोलियो अभियान की ड्यूटी पूरी, पारिश्रमिक ‘अधूरा’!

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कुचामनसिटी. महिला एवं बाल विकास विभाग में कार्यरत आंगनबाड़ीकर्मी भले ही पल्स पोलियो ेअभियान में अपनी ड्यूटी पूरी देते हो, लेकिन उन्हें पोलियो की दवा पिलाने की एवज में मिलने वाला पारिश्रमिक बहुत ही कम मिलता है। आंगनबाड़ीकर्मियों को कभी 75 तो कभी 100 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से ही पारिश्रमिक दिया जाता है। जबकि वे ड्यूटी पूरी तीन दिन की देते हैं। जानकारी के अनुसार अगले चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से अगले माह 0 से पांच वर्ष तक के बच्चों को पल्स पोलियो की दवा पिलानी थी। इस अभियान को सफल बनाने के लिए आंगनबाड़ीकर्मियों का सहयोग लेने की बात सामने आई थी। हालांकि अभी कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया है। जल्द ही नई तारीख घोषित की जाएगी। आंगनबाड़ी कार्मिक कार्यक्रम की शुरुआत के पहले दिन से तीसरे दिन तक पल्स पोलियो की दवा पिलाने में अपना सहयोग प्रदान करते हैं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग अपने स्तर पर आंगनबाड़ीकर्मियों की बैठकें आयोजित करवाता है। इसमें उनको दवा पिलाने के दौरान रखी जाने वाली सावचेती के बारे में बताया भी जाता है। हालांकि सभी आंगनबाड़ी कर्मियों को पहले से ही पता है कि किस तरह दवा पिलाई जाती है। क्योंकि वे बरसों से इस अभियान में ड्यूटी करती आई है। पत्रिका ने पल्स पोलियो की दवा पिलाने की एवज में मिलने वाले पारिश्रमिक के बारे में पता किया तो चौंकाने वाली स्थिति नजर आई। कुछ आंगनबाड़ीकर्मियों को जहां सिर्फ 75 रुपए प्रतिदिन पारिश्रमिक देने की बात सामने आई। वहीं सहायिका व आशा सहयोगिनी को भी सिर्फ 100 रुपए प्रतिदिन का पारिश्रमिक मिलने की बात कही गई। जबकि 75 या 100 रुपए तो उनके दूरदराज क्षेत्र में जाकर दवा पिलाने में खर्चा ही आ जाता है। ऐसे में सरकार की ओर से अभियान में उनकी सेवा बहुत कम राशि में ली जा रही है। जबकि अन्य सरकारी कर्मचारियों को पल्स पोलियो अभियान में ड्यूटी लगने पर ज्यादा राशि मिलती है। गौरतलब है कि अभियान काफी लम्बे समय से चल रहा है। लेकिन चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा है। नतीजन आंगनबाड़ीकर्मियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।...

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