[raipur] - जंगल म चुनई

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जं गल म चुनई होवत रहिस। बोकरा ह अपन दाई ले कहिस- दाई, मेहा सेर के चुनई परचार करत हंव। सेर ह मोला अपन चुनई सचालक बनाय हे। यदि 'सेर दादाÓ चुनई जीत जही त हमर किस्मत बदल जही। बोकरा के दाई जानत रहिस के हर चुनई के बाद हाल का होथे। वोहा दूनों हाथ ऊपर डहर उठा के दुआ मांगिस- या खुदा, हमर कौम ल सलामत रखबे। तीन महीना बाद म अखराब म खबर छपे रहिस - छेरी अउ सेर एके घाट म पानी पीयत देखे गीस।

जंगल म ए बात ह आगी कस बगर गे। कोनो ह कोलिहा से ऐकर बारे म वोकर मन के बात जाने बर चाहिस। बूढ़वा कोलिहा ह माखूर ल मुंह ह भरत जुवाब दिस- अरे कुछु नइ भाई, ए सब तो चोचला ए। काम जादा होय के सेती सेर ह छेरी ल 'स्टेनोÓ रखे हे। संविदा म भरती करे हे। तीन महीना पाछू देखहू छेरी के हालत ल।

फोटो - http://v.duta.us/vSgwsAAA

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