[rajasthan] - प्रदेश में लड़खड़ा रही है कांग्रेस की देन महात्मा गांधी नरेगा योजना, रोजगार का आंकड़ा गिरा

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प्रदेश में अधिकारियों की लापरवाही ग्रामीणों पर भारी पड़ रही है. महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत पात्र परिवारों को हर साल 100 दिन का रोजगार दिए जाए का प्रावधान है, लेकिन योजना की प्रभावी मॉनिटरिंग के अभाव में ग्रामीणों को पूरा रोजगार नहीं मिल पा रहा है. इतना ही नहीं साल दर साल पात्र परिवारों को 100 दिन रोजगार मिलने का आंकड़ा लगातार गिरता जा रहा है.

पात्र परिवारों को सौ दिन का रोजगार देने में इस साल अब तक उदयपुर जिला सबसे अव्वल है, लेकिन वहां भी केवल 2.8 प्रतिशत पात्र परिवारों को यह लाभ मिला है. बारां 2.8 प्रतिशत के साथ दूसरे, जैसलमेर 2.3 प्रतिशत के साथ तीसरे, बाड़मेर 2.1 प्रतिशत के साथ चौथे और चूरू 1.5 प्रतिशत उपलब्धि के साथ पांचवें स्थान पर है. सबसे फिसड्डी जिलों की बात करें तो जयपुर और टोंक 0.1 प्रतिशत उपलब्धि के साथ सबसे निचले पायदान पर हैं. वहीं सवाईमाधोपुर, दौसा और बूंदी भी सबसे फिसड्डी पांच जिलों में शुमार हैं. प्रदेश केवल सौ दिन का रोजगार देने में ही नहीं, बल्कि मानव दिवस सृजन में भी पिछड़ रहा है. मनरेगा में रोजगार हालांकि मांग पर आधारित है, लेकिन योजना के डिमाण्ड केप्चर सिस्टम में भी खामियां सामने आई हैं....

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