[ratlam] - धर्म की आराधना में मैत्री भावना परम आवश्यक: मुनिराज विजय

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रतलाम. मुनिराज मोक्षदर्शन विजय एवं विजय महाराज का वर्ष 2018 का चातुर्मास आराधना भवन श्रीसंघ पोरवाड़ों का वास पर बहुत ही उमंग, उल्लास और आनंदपूर्वक धर्ममय वातावरण में पूर्ण हुआ। गुरुदेव के विहार के समय प्रात: 7 बजे से ही भक्तगण बड़ी संख्या में आराधना भवन पहुंचना शुरू हो गए। गुरुदेव ने समाजजन के साथ चंद्रप्रभुस्वामी के दर्शन वंदन करने के बाद विहार प्रारंभ किया। ढोल नगाड़ो के संगीत के साथ भक्तगण गुरुजी अमारो अंतर्नाद अमने आपो आशीर्वाद...के नारे लगाते रहे।

पूरे रास्ते जगह-जगह समाज जन द्वारा गहुली की गई। स्टेशन रोड़ जैन मंदिर में चैत्यवंदन करने के पश्चात जुलूस टी आई टी रोड स्थित जैन धर्मशाला पर पहुंच कर धर्मसभा में परिवर्तित हो गया। उपस्थित समाजजन को मांगलिक प्रवचन देते हुए मुनिराज मोक्षदर्शन विजय ने फरमाया कि व्यक्ति के जीवन में अगर मैत्री भावना आ जाए तो वह धर्म करके अपनी आत्मा का कल्याण कर सकता है। धर्म की आराधना में मैत्री भावना परम आवश्यक है। मुनिराज विजय ने फरमाया कि व्यक्ति को संसार में रहना पड़ सकता है, लेकिन संसार में रह कर भी कैसे जीना है यह समझना आवश्यक है और रतलाम के इस वर्ष के चातुर्मास में इसीलिए सैंकड़ों की संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने नियम पचक्खाण आदि लिए है। उसकी अनुमोदना करते हुए उन्हे धर्म के पथ पर और आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया ।...

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