[sheopur] - डेढ़ सौ साल पुराना है आनंद माता मंदिर

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श्योपुर,

तिलचौथ (संकटचतुर्थी) का पर्व आज शहर सहित जिले भर में परंपरागत रूप में मनाया जाएगा। इस दौरान शहर के सूबात कचहरी स्थिति आनंदी माता मंदिर पर महाआरती और छप्पन भोग लगाया जाएगा। शहर के मध्य स्थित पुरानी कचहरी के पास श्री आनंदी माता का मंदिर काफी प्राचीन है और आनंदी माता के दर्शनों मात्र से ही श्रद्धालुओं के जीवन में आनंद भर जाता है।

आनंदी माता का रूप महिषासुर मर्दिनी का है। बताते हैं कि यह मंदिर अति प्राचीन है, जिसका ग्वालियर रियासत के समय करीब डेढ़ सौ साल पूर्व नवनिर्माण कराया गया। तब भी यहां पर घोर जंगल होता था तथा मंदिर जमीन की सतह से नीचे था। जहां पर बियावान जंगल होने से शेर भी आया जाया करते थे। इस मंदिर में महिषासुर मर्दिनी के अलावा माता की मूर्ति के ठीक सामने भैरोजी की प्रतिमा है तथा दाहिनी ओर शंकर पार्वती परिवार है। यह भी उतने ही पुराने है जितनी पुरानी माता की मूर्ति एवं मंदिर है। बताया गया है कि पूर्व में नवरात्रा में नवमी की रात्रि को भैंसे की बलि भैरोंजी को दी जाती थी उस समय मां की गर्दन कुछ क्षण के लिये सीधी हो जाती थी। लोगों का मानना है कि अब भी नवमी के दिन कुछ पल के लिए मां की गर्दन सीधी होती है।

फोटो - http://v.duta.us/4RxDIgAA

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