आबादी के बीच गोदाम, जगह-जगह होती है रीफिलिंग

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आजमगढ़। शहर से लेकर ग्रामीणांचल तक गैस सिलेंडर का प्रयोग मानक के अनुरूप नहीं किया जा रहा है। लगातार सिलेंडर के चलते घटनाएं हो रही है। इसके बाद भी न तो संबंधित विभाग ही ध्यान दे रहा है न ही जिम्मेदार अधिकारी ही इस पर लगाम लगाने की कोई कवायद कर रहे है। जगह-जगह आबादी के बीच जहां सिलेंडरों का गोदाम बना है तो वहीं कई जगहों पर अवैध रूप से सिलेंडरों की रीफिलिंग भी की जाती है।

मऊ जिले के नगर पंचायत वालिदपुर में सोमवार की सुबह गैस सिलेंडर में आग लगने से हुए विस्फोट से बड़ी घटना हो गई है। दर्जन भर से अधिक लोगों की मौत हो गई है तो वहीं डेढ़ दर्जन से अधिक लोग घायल है। यह घटनाएं अक्सर ही होती रहती है। इसके बाद भी लोग मानक की अनदेखी कर गैस सिलेंडरों का प्रयोग कर रहे है। जिले में भी साल भर पहले मुकेरीगंज स्थित एक पटाखा गोदाम में भीषण आग लगी थी। जिसमें 14 लोगों की मौत हुई थी। इस घटना में भी मुख्य कारण गैस सिलेंडर ही था। छोटे-बड़े कई हादसे सिलेंडरों के चलते हो चुके है। लगभग दस वर्ष पूर्व रसोई गैस सिलेंडर का प्रयोग कर रहे एक स्कूल वैन में आग लग जाने से बिलरियागंज के नसीरपुर में आधा दर्जन से अधिक बच्चे झुलस गये थे। इन हादसों के बाद भी न तो गैस एजेंसी संचालक न ही जिम्मेदार अधिकारी अथवा उच्चाधिकारी ही इस ओर ध्यान देते है। मानक की अनदेखी कर शहर से लेकर ग्रामीणांचल तक जगह-जगह आबादी के बीच रीफिलिंग की जा रही है तो वहीं कई गैस एजेंसी संचालक आज भी आबादी के बीच ही अपने गोदाम बना रखे है अथवा आबादी के बीच ही उपभोक्ताओं की भीड़ एकत्र कर गैस सिलेंडरों का वितरण करते है। शहर के एलवल मुहल्ले में प्रतिदिन एक कंपनी की गाड़ी आती है और आबादी के बीच स्थित एक छोटे से जगह पर सिलेंडर का वितरण किया जाता है। ऐसा ही कुछ हाल रोडवेज के पास भी देखने को मिल सकता है। ग्रामीणांचल की बात की जाए तो हर बाजारों में आबादी के बीच ही गैस कंपनियां अस्थाई स्थल पर लाइन लगवा कर उपभोक्ताओं को सिलेंडर वितरित करते है।...

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