अब दीवारों को नहीं भा रही कलई, प्लास्टिक पेंट से घर हो रहे रोशन

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बजरंग पारीक

डीडवाना. दीपावली अब ज्यादा दूर नहीं है, लोग भी इसके स्वागत में पूरी तरह से जुटे हुए हैं। इसकी तैयारियों में प्रमुख है मकानों की साफ-सफाई व रंग-पुताई। अब जमाने के साथ मकानों की रंगाई-पुताई का तरीका भी बदल गया है। अब दीवारों को कळी (कलई) की रंगत नहीं भा रही। दुकानदार भी समय की मांग को पूरी तरह से समझने लगे हैं, कळी-कूंची की जगह अब दुकानों में पेंट व ब्रश नजर आने लगे हैं। क्षेत्र में कई तो जिले में कलई के अनेक भट्टे (कलई बनाने के स्थान) बंद हो चुके है। फिर एक समय आया जब डिस्टेंपर की तरफ लोगों का रुझान बढा, पाउच व डिब्बे में डिस्टेंपर लोगों को उपलब्ध होने लगा। डिस्टेंपर के साथ ही प्लास्टिक पेंट जिसे इमुलेशन भी कहा जाता है, उसकी तरफ लोगों का रुझान बढने लगा। सफेद-हल्की नीली सी नजर आने वाले घरों-प्रतिष्ठानों की दीवारें अब रंगीन होने लगी। समय के साथ जिस प्रकार से लोगों का रुझान बदला उसके कई कारण है। डिस्टेंपर व पेंट से मनचाहे रंग-बिरंगे कलर से दीवारों को सजाया जा सकता है, जल्दी से रंग जाता भी नहीं, भवन की सुंदरता के लिए भी डिस्टेंपर व पेंट खास है। ऐेसे में अब लोगों ने कलई को भुला सा दिया है।...

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