अभिजीत के गुरु अंजन मुखर्जी बोले- हर शिक्षका को इस तरह के गुरुदक्षिणा का रहता है इंतजार

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गंगा ढाबा और जेएनयू के पत्थर... मुझे 36 साल पहले की बहुत यादें तो ताजा नहीं हैं पर अपने गुरु होने पर गर्व महसूस कर रहा हूं। जेएनयू से ऐसा नाता रहा कि लाख चाहने पर भी कोई भूल नहीं सकता है। फिर चाहें एक प्रोफेसर के रूप में मैं (प्रो. अंजन मुखर्जी) या फिर प्रोफेसर व जेएनयू के पूर्व छात्र व नोबेल विजेता अभिजीत बनर्जी।

देश-दुनिया के हर मुद्दे पर जेएनयू के आम छात्रों की तरह अभिजीत भी बेबाक राय रखते थे। वे जेएनयू की संस्कृति को उतना ही पसंद करते थे, जितना आज की पीढ़ी। यही कारण है कि जब 2016 में जेएनयू छात्रों पर कटाक्ष हुआ तो उन्होंने अपने लेख के माध्यम से लिखा कि नीड थिंकिंग स्पेसेज लाइक जेएनयू एंड द गर्वनमेंट मस्ट स्टे आउट ऑफ इटष। इसका मतलब था कि हमें जेएनयू जैसे सोचने-विचारने वाली जगह की जरूरत है और सरकार को निश्चित तौर पर वहां से दूर रहना चाहिए।...

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