खाओ मन भर, झूठा न छोड़ें कणभर

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उज्जैन. इतना लो थाली में की, झूठा न जाए नाली में...खाओं मन भर लेकिन झूठा न छोड़े कणभर। आज वल्र्ड फूड डे के मौके पर इन पंक्तियों की प्रासंगिकता पर चर्चा लाजिमी है। ये वाक्य भले ही सुनने में सामान्य लगे लेकिन जिन लोगों के पास खाने के लिए पेटभर अन्न नहीं है उनके लिए यह अहम है। बड़े रेस्त्रां, होटल व संपन्न परिवारों में जितना खाना छोड़ दिया जाता है, उसमें हजारों लोग की भूख मिट सकती है। शहर में युवाओं की रॉबिनहुड संस्था इसी की मिसाल बनकर उभरी है। इनका बस यहीं ध्येय है कि किसी भी सहभोज में बचा खाना फिंकने या खराब होने की बजाय किसी जरूरतमंद के पेट तक पहुंच सके। संस्था अपने खर्च से इस कार्य को अंजाम देती है।...

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