गोबर के गमलों ने सरस मेले में मचाई धूम

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सरस मेले में गोबर के गमलों ने खिंचा लोगों का ध्यान

मुजफ्फरनगर। दिल्ली में चल रहे सरस मेले में मुजफ्फरनगर के गांव सरवट में संचालित स्वयं सहायता समूह द्वारा तैयार किए गए गोबर के गमलों की धूम रही। इन गमलों में पौधे तैयार करने के बाद उन्हें कहीं भी रोपा जा सकता है। इसमें पॉलिथीन की आवश्यकता नहीं पड़ती और गमले में प्रयोग गोबर खाद का भी काम करता है।

नगर से सटे हुए गांव सरवट में संगम स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं ने कुछ समय पूर्व गोबर से गमले बनाने का काम शुरू किया है। उन्होंने अपने इस प्रोजेक्ट को दिल्ली में दस अक्तूबर से शुरू हुए सरस मेले में प्रदर्शित किया है। यह मेला 23 अक्तूबर तक चलेगा। समूह की अध्यक्ष बबली मैनवाल ने बताया कि गोबर के गमले को मेले में खूब पसंद किया जा रहा है। लोग इसके संबंध में जानकारी ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि 15-15 प्रतिशत लकड़ी का बुरादा और मिट्टी के अतिरिक्त गोबर मिलाकर एक मशीन के जरिये उसका गमला बनाया जाता है। पौधे तैयार करने के लिए यह गमला बेहद लाभदायक और पर्यावरण के अनुकूल भी है। अब तक पौधे तैयार करने में पॉलिथीन का प्रयोग किया जाता है, इससे प्रदूषण बढ़ता है। गोबर के गमले में तैयार किए गए पौधे को गमले के साथ ही रोपा जा सकता है। गमला स्वयं ही गलकर नष्ट हो जाएगा और इससे खाद भी मिलेगी। एक गमले की कीमत मात्र दस रुपये है। इसे बनाने के बाद पेंट कर आकर्षक बनाया जाता है। उन्होंने बताया कि सरस मेले में गोबर के गमले का उनका स्टाल सबके आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

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