जयशंकर प्रसाद के निबंध और आत्मकथा को जानना जरूरी

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वाराणसी। वसंत महिला महाविद्यालय राजघाट में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के पहले दिन वक्ताओं ने छायावाद पर चर्चा की। बतौर मुख्य अतिथि राष्ट्रभाषा प्रचार समिति वर्धा के अध्यक्ष प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित ने कहा कि छायावाद को समझने के लिए जयशंकर प्रसाद के निबंध और आत्मकथा को पढ़ने की जरूरत है।

कालेज के हिंदी विभाग और हिंदुस्तानी एकेडमी प्रयागराज के तत्वावधान में छायावाद:शताब्दी वर्ष विषयक संगोष्ठी में प्रो. दीक्षित ने कहा कि गद्यात्मक शैली और छायांकन के बीच से छायावाद का मार्ग प्रशस्त होता है। विशिष्ट अतिथि भारतीय भाषा विभाग जेएनयू के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर रामबृक्ष ने कहा की किशोर वय की भावुकता से छायावाद की शुरुआत होती है। प्रोफेसर चंद्रदेव यादव ने छायावाद की बात करते हुए कहा कि साहित्य का मूल व्यावसायिकता से दबता चला जा रहा। अध्यक्षता करते हुए डॉ. जितेंद्र नाथ मिश्र ने कहा कि छायावाद मानवता की मुक्ति का तथ्य लेकर आता है। अतिथियों का स्वागत संयोजिका शशि कला त्रिपाठी, धन्यवाद ज्ञापन प्राचार्य डॉ अलका सिंह ने किया। इस दौरान प्रो.श्रीप्रकाश शुक्ल, डॉ. कमलेश वर्मा, प्रो.वशिष्ठ अनूप, डॉ. वंदना झा आदि मौजूद रहे।

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