बांध के विरोध में सड़क पर उतरे वनवासी, घेरा कलेक्ट्रेट जमकर किया विरोध

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हरदा/ टिमरनी ब्लाक के तीन वनग्रामों के लोगों ने मंगलवार को जिला मुख्यालय पहुंचकर मोरन-गंजाल सिंचाई परियोजना का जमकर विरोध किया। रैली लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे तो एसडीएम ने ज्ञापन लेकर उनकी मांग से कलेक्टर को अवगत कराने का कहा। वनवासी कलेक्टर से मिलने की मांग करने लगे तो प्रतिनिधिमंडल को मिलवाया गया। कलेक्टर ने उनके गांव नहीं डूबने की बात कही तो ग्रामीणों ने यह बात लिखित में चाही, लेकिन प्रशासन द्वारा देर तक यह लिखकर नहीं दिया गया। इस दौरान बाकी लोग मुख्य द्वार पर नारे लगाते हुए डटे रहे। दूसरे दौर में उनसे चर्चा के लिए अपर कलेक्टर प्रियंका गोयल पहुंची, लेकिन बात नहीं जमी। इसके बाद कलेक्टर एस. विश्वनाथन को वनवासियों से मिलने जाना पड़ा। करीब तीन घंटे के प्रदर्शन के दौरान वनवासी एक ही मांग पर अड़े रहे कि बांध न बने। पर्यावरण अनुमति के बगैर जारी टेंडर निरस्त किए जाएं। इस दौरान कलेक्टर ने उन्हें आश्वस्त किया कि नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण से संपर्क कर नियमानुसार कार्रवाई के प्रयास किए जाएंगे। अपर कलेक्टर गोयल ने कहा कि प्रस्ताव स्वीकृत होने के पहले इन गांव के लोगों ने अपनी मंजूरी दी होगी। इस पर जिंदगी बचाओ अभियान शमरुख धारा ने कहा कि किसी भी ग्रामीण ने बांध निर्माण पर अपनी सहमति नहीं दी। वे बीते कई महीनों से कलेक्ट्रेट में इस संबंधी आवेदन दे चुके, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। बगैर पर्यावरण अनुमति के २३७४ हेक्टेयर वनक्षेत्र डुबोया जा रहा है। इस पर एडीएम गोयल ने कहा कि वर्ष २०१५ में हुई सुनवाई के दौरान क्या कार्रवाई हुई यह देखा जाएगा। वहीं कलेक्टर विश्वनाथन ने कहा कि एक सप्ताह बाद इन गांवों के कुछ लोग आ जाए उन्हें बता दिया जाएगा कि तब क्या कार्रवाई हुई थी और प्राधिकरण की क्या कार्रवाई चल रही है। कलेक्टर के आश्वासन के बाद वनवासी वापस अपने गांव लौटे।...

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