यहां स्च'छता के लिए कर रहे जागरूक तो वहां जमा है कचरा

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आलमपुर. स्व'छता को लेकर जहां चहुंओर अलख जगाई जा रही है यहां तक कि आमजन को जागरूक करने के लिए सांसद लगातार जिले में पदयात्रा निकाली जा रही है तो वहीं आलमपुर में ट्रेचिंग ग्राउंड होने के बाद भी दो हेक्टेयर जमीन अनुपयोगी साबित हो रही है। स्थिति यह है कि रोड किनारे बड़े कचरे से जहां बदबू आ रही है तो वहां जमा हो रहे मवेशी और उड़ती धूल दुर्घटना का कारण भी बन भी रही है। फिर टै्रचिंग ग्राउंड के निर्माण में कोई रूचि नहीं ली जा रही है। जाने ऐसा क्यो हो रहा है।

नगर परिषद द्वारा कस्बे से निकलने वाले रोजमर्रा के कचरे के संग्रहण व निपटान के लिए ट्रेचिंग ग्राउण्ड का निर्माण नहीं कराया जा रहा है। 10 साल से ट्रेचिंग ग्राउण्ड के लिए चिह्नित जमीन अनुपयोगी पड़ी है। शहर का सारा कचरा सडक़ों के किनारे फेंका जा रहा है। लगभग डेढ़ दशक पूर्व जिला प्रशासन नगर परिषद को ट्रेचिंग ग्राउण्ड के लिए 2 हैक्टेयर जमीन हस्तांतरित कर चुका है। नगर परिषद द्वारा इस जमीन की कोई सुध नहीं लिए जाने व यहां ट्रेचिंग ग्राउण्ड न बनाए जाने के चलते जमीन पर झाड़ झंखाड़ उग आया है। शहर के सारे कचरे को आलमपुर-देभई-सिरसा-सेंवढ़ा मार्ग पर सडक़ के किनारे डाला जा रहा है जिससे आसपास सड़ांध फैली रहती है और आने जाने वालों को परेशानी हो रही है। नगर परिषद की तत्कालीन अध्यक्ष नर्मदा देवी कौरव के कार्यकाल में 2004 से 2009 के बीच में नगर में ट्रेचिंग ग्राउंड के लिए जमीन चिह्नित की गई थी। यहां तक कचरा वाहनों के आसानी से आवागमन के लिए डब्ल्यूबीएम रोड भी डाला गया था। नर्मदा देवी कौरव का कार्यकाल खत्म होने के बाद ट्रेचिंग ग्राउंड की कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली गई। वर्तमान में ट्रेचिंग ग्राउंड जंगल में तब्दील हो गया है।...

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